क्या है इस खबर में:

यह लेख बिहार कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 30वें अनुसंधान परिषद की बैठक के बारे में है, जिसमें कृषि विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीकों और शोधों पर चर्चा की गई।




भागलपुर में बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 30वीं अनुसंधान परिषद की बैठक का आयोजन हुआ। यह बैठक दो दिन तक चली और यहां वैज्ञानिक खेती और कृषि आधुनिकीकरण पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का नेतृत्व उपकुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने किया और इसमें कई कृषि विशेषज्ञ और किसान शामिल हुए।



बैठक के अंतिम दिन विभिन्न विभागों की प्रस्तुतियों में कृषि के कई क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया। इनमें अणु जीवविज्ञान, पौधों की बीमारियों और कीट विज्ञान शामिल थे। वैज्ञानिकों ने नई फसल किस्में जैसे सरसों की किस्म ‘साबौर राय-1’ और गेहूं की किस्म ‘साबौर गेहूं-5’ पेश की।



आम जनता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि तीन प्रगतिशील महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे कृषि विश्वविद्यालय की ट्रेनिंग ने उनकी जिंदगी बदली है। इससे ग्रामीण महिलाओं में आत्म-विश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है, जिससे उनकी आय में सुधार हुआ है।



कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने और अधिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को सलाह दी कि वे अंतरराष्ट्रीय शोध के विकास पर ध्यान दें। डॉ. राम भजन ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक क्षमता पश्चिमी संस्थानों के समान है।



बैठक का समापन नए फसल किस्मों और तकनीकों को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों को प्रमाण पत्र देने के साथ हुआ। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने सभी शोधकर्ताओं और किसानों का धन्यवाद किया और वैज्ञानिकों को कृषि क्षेत्र के लाभ के लिए शोध अनुदान का सही उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।





संक्षेप:

  • बैठक का आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय में हुआ।

  • नई फसल किस्में और तकनीकों पर चर्चा की गई।

  • महिलाओं ने अपनी सफलताओं और बदलाव साझा किए।

  • विशेषज्ञों ने सहयोग और शोध पर जोर दिया।

  • कार्यक्रम में प्रमाण पत्र और पुरस्कार दिए गए।




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