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बिहार के शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए नए कदम उठाए हैं।




पटना में, बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने एक बैठक की जहां उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के तहत योजनाओं की समीक्षा की। यह बैठक मंगलवार को हुई थी।


बैठक में मंत्री ने कहा कि हर जिले, उपखंड, और ब्लॉक में एक सरकारी स्कूल को “मॉडल स्कूल” के रूप में चुना जाएगा, ताकि यह प्राइवेट स्कूलों के मानकों के बराबर या उससे बेहतर हो सके। इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन पंचायतों में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थापित किए जाएं जहां अभी तक स्कूल नहीं हैं।


सुनील कुमार ने शिक्षकों के बकाया वेतन संबंधी समस्याओं को हल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी स्टाफ को HRMS पोर्टल के माध्यम से सही महंगाई भत्ता और घर भाड़ा भत्ता मिलना चाहिए।


मंत्री ने स्कूलों की नियमित जांच के महत्व को भी बताया। उन्होंने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र से नाराजगी जताई क्योंकि कई जिलों, जैसे पटना, भागलपुर, और मुजफ्फरपुर, ने अभी तक शिक्षक की रिक्तियों की रिपोर्ट नहीं दी है।


इस बैठक में यह भी बताया गया कि अब तक 17 जिलों ने कक्षा 1 से 12 तक की रिक्तियों की जानकारी प्रदान की है। आगे के कदमों के तहत, अधिकारियों को शिक्षकों की पदोन्नति और तैनाती को छात्रों की संख्या के अनुसार व्यवस्थित करने के लिए कहा गया है।





Summary:

  • शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की योजना बनाई।

  • हर जिले में एक “मॉडल स्कूल” बनाने का निर्णय लिया गया।

  • शिक्षकों के वेतन और भत्तों पर ध्यान देने की बात कही गई।

  • स्कूलों की नियमित जांच के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।

  • अभी तक 17 जिलों ने रिक्तियों की जानकारी दी है।



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