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यह लेख मुजफ्फरपुर में धुंध के कारण ट्रेनों में हुई देरी और रेलवे अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर जानकारी देता है।




मुजफ्फरपुर में हाल ही में धुंध इतनी ज्यादा बढ़ गई कि ट्रेन चालकों को सिग्नल देखने में भी मुश्किल हुई। इससे चालकों को ट्रेनों की गति धीमी करनी पड़ी ताकि वो घर के सिग्नल के पास सुरक्षित रूप से चल सकें। एक चालक ने कहा कि धुंध के समय में 50 मीटर की दूरी पर भी सिग्नल दिखाई नहीं देते थे।



भारत का स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, ‘कवच’, चालक को दो किलोमीटर दूर के सिग्नल देखने में मदद करता है और टकराव से बचने के लिए अपने आप ब्रेक लगाता है। हालांकि, यह प्रणाली कुछ मार्गों पर लागू की गई है, लेकिन पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र में अभी तक इसे व्यापक रूप से नहीं लगाया गया है।



इस धुंध के कारण कई ट्रेनें देरी का सामना कर रही हैं। जैसे कि, जोकबनी-दानापुर वंदे भारत ट्रेन मुजफ्फरपुर में दो घंटे से अधिक लेट आई, जबकि बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस पांच घंटे से अधिक देरी से आई। दिल्ली, अमृतसर, अहमदाबाद और डिब्रूगढ़ से आने वाली कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों में भी तीन से छह घंटे की देरी हुई।



यात्री, जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल हैं, को ठंडे तापमान में घंटों तक स्टेशन पर इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने आश्रय और जानकारी की कमी की शिकायत की, क्योंकि देरी बढ़ती गई। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि धुंध इसकी मुख्य वजह है।



रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनें सुरक्षित रूप से चल रही हैं और धुंध के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी। ‘कवच’ प्रणाली की तैनाती की गति पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर व्यस्त मार्गों पर, क्योंकि यात्रियों को आने वाले समय में और भी देरी का सामना करना पड़ सकता है।





Summary:

  • मुजफ्फरपुर में धुंध के कारण ट्रेनों में देरी हुई।

  • कवच प्रणाली की तैनाती अभी भी सीमित है।

  • यात्री कई घंटों तक ठंड में इंतजार कर रहे हैं।

  • रेलवे अधिकारियों ने सुरक्षा के लिए ट्रेन संचालन को नियंत्रित किया।

  • भविष्य में और भी देरी की आशंका जताई गई है।



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