भागलपुर के रेलवे कर्मचारियों को गोड्डा स्टेशन पर काम करने के लिए भेजा जा रहा है, जिससे वे काफी नाराज हैं। इसी विरोध में Eastern Railway Men’s Union (ERMU) ने भागलपुर कोचिंग डिपो में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने “Save Railways – Save Country” के नारे लगाए और एक बड़ी मानव श्रृंखला बनाई। उनका साफ कहना है कि गोड्डा में अपना स्टाफ नहीं है, इसलिए भागलपुर के कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।

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गोड्डा में काम का बोझ और भागलपुर के कर्मचारियों की परेशानी

गोड्डा स्टेशन पर अभी अपना परमानेंट स्टाफ यानी स्वीकृत पदों पर बहाली नहीं है। इस वजह से भागलपुर से Carriage and Wagon और इलेक्ट्रिकल विभाग के कर्मचारियों को वहां काम संभालने के लिए भेजा जा रहा है। यूनियन का कहना है कि यह तरीका सही नहीं है और इससे भागलपुर के काम पर भी असर पड़ रहा है।

रेलवे के जनरल मैनेजर ने अप्रैल 2026 तक गोड्डा में नई पिट लाइन चालू करने का सख्त निर्देश दिया है। जब तक यह तैयार नहीं होती, तब तक Godda-New Delhi Humsafar Express और Godda-Tatanagar Express जैसी बड़ी ट्रेनों की मरम्मत के लिए उन्हें भागलपुर लाना पड़ता है। यूनियन ने मांग की है कि गोड्डा स्टेशन के लिए अलग से नए पदों का सृजन किया जाए और वहां पक्की बहाली हो।

यूनियन ने रखी अपनी मांगे, निजीकरण का किया विरोध

प्रदर्शन के दौरान ERMU के ब्रांच सेक्रेटरी चंदन कुमार ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियां कर्मचारियों के हित में नहीं हैं। यूनियन ने रेलवे में बढ़ रही आउटसोर्सिंग और निजीकरण को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे परमानेंट कर्मचारियों के अधिकार कम हो रहे हैं।

यूनियन ने अपनी मुख्य मांगों को लेकर मालदा डिवीजन को संदेश दिया है:

  • नए 4 लेबर कोड को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह हड़ताल के अधिकार को सीमित करते हैं।
  • ट्रेड यूनियन की मान्यता के लिए 51% वोट की अनिवार्य शर्त को हटाया जाए।
  • रेलवे के कोर कामों में ठेका प्रथा (Contract System) को बंद किया जाए।
  • गोड्डा में तुरंत नए परमानेंट स्टाफ की भर्ती शुरू की जाए ताकि भागलपुर के स्टाफ को परेशान न होना पड़े।

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