बिहार में बिजली की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में बड़ा काम शुरू हो गया है। नवादा के रजौली में राज्य का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट (Nuclear Power Plant) बनने जा रहा है। इस पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है और उम्मीद है कि 2027-28 तक इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके अलावा बांका और सीवान में भी ऐसे प्लांट लगाने के लिए सर्वे चल रहा है।

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नवादा में 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन

नवादा जिले के फुलवरिया जलाशय के पास यह प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई है। यहाँ Small Modular Reactor (SMR) तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे करीब 2000 मेगावाट बिजली बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए पानी और जमीन का सर्वे काफी हद तक हो चुका है। एनटीपीसी (NTPC) और एनपीसीआईएल (NPCIL) मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस प्लांट के लिए साल भर पानी की जरूरत होगी, जिसके लिए गंगा या स्थानीय जलाशयों से इंतजाम किया जा रहा है।

बांका और सीवान में भी चल रही है तैयारी

सिर्फ नवादा ही नहीं, बांका और सीवान जिले भी इस रेस में शामिल हैं। बांका के शंभूगंज और भितिया में शुरुआती सर्वे पूरा कर लिया गया है, क्योंकि यहाँ की पथरीली जमीन और कम आबादी इस काम के लिए सही मानी जा रही है। वहीं, सीवान में अभी जमीन और पानी की जांच चल रही है। सीवान में पानी तो उपलब्ध है लेकिन भूकंप के खतरे को देखते हुए तकनीकी टीम अभी जांच कर रही है।

लखीसराय में सोलर प्रोजेक्ट पर काम जारी

परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ सौर ऊर्जा पर भी काम तेजी से हो रहा है। लखीसराय के कजरा में सोलर प्रोजेक्ट का पहला फेज शुरू हो गया है। यहाँ जनवरी 2027 तक कुल 301 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बताया कि अभी राज्य की 75% बिजली कोयले से बनती है, इसलिए भविष्य की जरूरतों को देखते हुए क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ना जरूरी है।


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