भागलपुर के लोगों का हवाई जहाज से उड़ान भरने का सपना अब जल्द ही हकीकत में बदलने वाला है. सुल्तानगंज में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए डीपीआर यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने वाली एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अब आखिरी दौर में है. बिहार नागरिक उड्डयन विभाग ने तकनीकी रूप से योग्य कंपनियों की प्रस्तुति देख ली है और अब जल्द ही काम शुरू करने वाली कंपनी का नाम तय हो जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि अगले 6 महीने के भीतर रनवे और अन्य निर्माण कार्यों के लिए जमीन पर काम शुरू कर दिया जाए.
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एयरपोर्ट निर्माण और डीपीआर को लेकर क्या है तैयारी
इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल काफी तेज हो गई है. नागरिक उड्डयन विभाग ने 25 फरवरी 2026 को कंसल्टेंट चयन के लिए टेंडर जारी किया था, जिसकी तकनीकी बिड 10 मार्च को खोली गई थी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की है और अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस स्थल का हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के साथ-साथ पुराने एयरपोर्ट के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
जमीन अधिग्रहण और तकनीकी जानकारी का पूरा विवरण
एयरपोर्ट के निर्माण के लिए सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम के पास का इलाका चुना गया है. केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए उड़ान 5.2 योजना के तहत राशि का प्रावधान किया है. जमीन और निर्माण से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| कुल जमीन का अधिग्रहण | 931 एकड़ |
| जमीन के लिए स्वीकृत बजट | 472.72 करोड़ रुपये |
| उत्तरी रनवे की लंबाई | 4000 मीटर |
| दक्षिणी रनवे की लंबाई | 3800 मीटर |
| टर्मिनल की लंबाई और चौड़ाई | 1000 मीटर x 500 मीटर |
| प्रस्तावित स्थान | अजगैवीनाथ धाम, सुल्तानगंज |
आम आदमी और भागलपुर के कारोबार को क्या होगा फायदा
इस एयरपोर्ट के शुरू होने से भागलपुर सिर्फ सिल्क सिटी ही नहीं बल्कि एक बड़ा कमर्शियल हब बनकर उभरेगा. सिल्क कारोबारियों और किसानों के लिए एयर कार्गो की सुविधा मिलेगी जिससे उनके उत्पाद सीधे देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सकेंगे. सुल्तानगंज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, एयरपोर्ट बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे. भागलपुर और पूर्वी बिहार के जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से विकास की रफ्तार काफी तेज होने की उम्मीद है.






