बिहार के भागलपुर में गंगा नदी के पानी को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। नेपाल और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों की रिसर्च में खुलासा हुआ है कि गंगा की तलहटी में भारी मात्रा में आर्सेनिक और चमड़ा उद्योग का कचरा मिल रहा है। यह खतरनाक कचरा और केमिकल सीधे नदी में बहाया जा रहा है, जिससे पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा खतरे के निशान 0.05 मिलीग्राम के पार पहुंच गई है। इस शोध के बाद अब स्थानीय लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों की रिसर्च में क्या हुआ बड़ा खुलासा?
नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय और दक्षिण कोरिया के कांगवॉन नेशनल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने भागलपुर में गंगा के प्रदूषण पर गहरा शोध किया है। इस शोध में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:
- खतरनाक केमिकल: चमड़ा उद्योग में पशुओं की खाल साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाला जहरीला केमिकल सीधे गंगा में बहाया जा रहा है।
- आर्सेनिक का स्तर: पानी में आर्सेनिक की मात्रा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक हो गई है, जबकि WHO इसे 10 माइक्रोग्राम से अधिक होने पर असुरक्षित मानता है।
- बीमारियों का खतरा: जेएलएनएमसीएच के डॉक्टर आनंद सिन्हा के मुताबिक, ऐसा दूषित पानी पीने से त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- प्रदूषण के स्रोत: मेडिकल कचरा, खाद-कीटनाशक और अवैध बालू खनन भी नदी को प्रदूषित कर रहे हैं।
गंगा को बचाने के लिए क्या हो रही है सरकारी कोशिश?
प्रदूषण की खबरों के बीच प्रशासन और सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं और बुनियादी ढांचे पर काम शुरू किया है। भागलपुर के साहिबगंज में एक बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी शुरू किया गया है ताकि गंदा पानी सीधे गंगा में न मिले।
| विशेषता | जानकारी |
|---|---|
| STP की लागत | 413 करोड़ रुपये |
| STP की क्षमता | 45 MLD (साहिबगंज) |
| नया नियम | नदी में निर्माण सामग्री गिराने पर भारी जुर्माना |
| NGT का आदेश | प्रदूषण फैलाने वालों पर 50 हजार से लेकर लाखों का जुर्माना |
हाल ही में 17 मार्च 2026 को सुल्तानगंज में गंगा स्वच्छता पखवाड़ा भी मनाया गया ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। इसके अलावा 12 वार्डों में पाइपलाइन लीकेज के कारण दूषित पानी की समस्या को सुधारने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद मानकों का पालन न करने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है।






