भागलपुर शहर इन दिनों स्ट्रीट लाइट के बड़े संकट से जूझ रहा है और मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक अंधेरा छाया हुआ है। एस्सल कंपनी के साथ नगर निगम का करार 31 दिसंबर 2025 को समाप्त होने के बाद से रखरखाव की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले आठ महीनों से नई लाइटों की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया अटकी हुई है, जिसके कारण शहर की रोशनी व्यवस्था भगवान भरोसे है। नगर आयुक्तों के लगातार तबादलों और टेंडर की शर्तों में बार-बार बदलाव होने से यह देरी हुई है।
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स्ट्रीट लाइट योजना और बजट में देरी के कारण
नगर निगम ने शहर के 51 वार्डों में कुल 5068 नई स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए 5.21 करोड़ रुपये की एक योजना तैयार की थी। इस योजना के तहत दुर्गा पूजा से पहले लाइट लगाने की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी कारणों से यह काम आगे नहीं बढ़ सका। इस बीच, सेंसर-आधारित लाइट लगाने के प्रस्ताव से बजट 5 करोड़ से बढ़कर 13 करोड़ रुपये पहुंच गया था, जिसे अधिक खर्च के कारण फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| करार समाप्त होने की तिथि | 31 दिसंबर 2025 |
| प्रस्तावित नई लाइटों की संख्या | 5068 लाइट |
| शुरुआती बजट अनुमान | 5.21 करोड़ रुपये |
| टेंडर ड्राफ्ट की वर्तमान स्थिति | अंतिम मसौदा तैयार |
| वित्तीय वर्ष बजट प्राथमिकता | 2026-27 बजट में शामिल |
| प्रभावित वार्डों की संख्या | 51 वार्ड |
अधिकारियों और पार्षदों की प्रतिक्रिया
शहर में अंधेरे को लेकर पार्षदों ने निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षद संजय सिन्हा का कहना है कि हर बैठक में स्ट्रीट लाइट पर चर्चा होती है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नहीं दिखता। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय की सामग्री खरीदने में तेजी दिखाई जाती है, जबकि जनहित के कार्यों की अनदेखी की जा रही है। वहीं, रोशनी शाखा प्रभारी जयप्रकाश यादव ने बताया कि तकनीकी स्वीकृति मिलते ही दो से चार दिनों के भीतर नई लाइटों के लिए निविदा जारी कर दी जाएगी। वर्तमान में निगम अपने स्तर पर छोटी मरम्मत का काम करा रहा है।
- नगर विकास एवं आवास विभाग से तकनीकी स्वीकृति मिलने का इंतजार है।
- मेंटेनेंस एजेंसी ईईएसएल का करार खत्म होने से मरम्मत कार्य ठप है।
- तीन नगर आयुक्तों के कार्यकाल के दौरान निविदा शर्तों में कई बार बदलाव किए गए।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में स्ट्रीट लाइट को प्रमुखता दी गई है।






