बिहार सरकार ने राज्य में कारोबार और नई संस्थाएं खोलने के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक हाई लेवल बैठक में यह निर्णय लिया गया है। अब राज्य में स्कूल, अस्पताल और उद्योग लगाने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार ने ‘फेज-2’ के तहत नियमों को आसान बनाने का काम शुरू कर दिया है।

जमीन मापी और लैंड यूज़ पर क्या है नया नियम?

जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को बड़ी राहत दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी के सभी पेंडिंग आवेदनों को निपटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से जमीन मापी की समय सीमा भी तय कर दी गई है।

  • विवाद रहित जमीन की मापी अब फीस जमा करने के 7 दिनों के भीतर पूरी होगी।
  • विवादित जमीन के मामलों में मापी 11 दिनों के अंदर करनी होगी।
  • जमीन का उपयोग बदलने (Change in Land Use – CLU) की अनिवार्यता को खत्म करने का प्रस्ताव है। इससे सर्किल रेट का 10% पैसा बचेगा।
  • अधिकारियों को मापी की रिपोर्ट 14 दिनों के अंदर पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

स्कूल, अस्पताल और बिजनेस वालों को क्या फायदा?

प्राइवेट स्कूल और यूनिवर्सिटी खोलने के लिए अब जमीन और बिल्डिंग की शर्तों को कम किया जाएगा। पहले के कड़े नियमों के कारण कई लोग संस्थान नहीं खोल पाते थे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लाइसेंस के लिए भी अब एक ही नोडल एजेंसी बनाई जाएगी, जिससे एक ही जगह से सारी अनुमति मिल सके।

छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए ‘सेल्फ डिक्लेरेशन’ यानी खुद से जानकारी देने की व्यवस्था लागू होगी। इसके अलावा ‘ऑटो अपील सिस्टम’ शुरू किया जा रहा है। अगर तय समय में सरकारी काम नहीं हुआ, तो सिस्टम अपने आप इसकी शिकायत बड़े अधिकारी को भेज देगा।

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