बिहार में चीनी उद्योग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। गन्ना उद्योग मंत्री Sanjay Kumar Paswan ने बताया है कि राज्य के 25 जिलों में नई चीनी मिलें खोलने और पुरानी मिलों को चालू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए सभी संबंधित जिलों के District Magistrates (DM) को जमीन चिन्हित करने के लिए पत्र भेज दिया गया है। सरकार का मकसद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना और किसानों को गन्ने का सही दाम दिलाना है।

जमीन के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर मिल के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन की तलाश की जाए। यह जमीन ऐसे इलाकों में होनी चाहिए जहां पहले से 30,000 से 40,000 एकड़ क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। इससे किसानों को फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचेगा। साथ ही वहां सिंचाई की अच्छी सुविधा होना भी जरुरी है।

किन जिलों में खुलेंगी मिलें?

सरकार ने जिन जिलों में जमीन खोजने का आदेश दिया है, उनकी सूची काफी लंबी है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित जिले शामिल हैं:

  • उत्तर बिहार: मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, समस्तीपुर, सिवान, मोतिहारी, बेतिया, पूर्णिया, वैशाली, सारण, मधुबनी और दरभंगा।
  • दक्षिण और मध्य बिहार: पटना, गया, रोहतास, नवादा, बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, जमुई, भागलपुर, नालंदा, बांका और मधेपुरा।

इसके अलावा रैयाम (दरभंगा) और सकरी (मधुबनी) में मिल लगाने का जिम्मा विशेष रूप से सहकारिता विभाग को दिया गया है।

बजट और रोजगार का प्लान

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में चीनी उद्योग विभाग के लिए कुल 340 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले बार से 148 करोड़ ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य 25 नई मिलें खोलने और 9 बंद पड़ी मिलों (जैसे मोतीपुर, वारिसलीगंज, बनमनखी) को फिर से शुरू करने का है। इन नई मिलों में सिर्फ चीनी नहीं बनेगी, बल्कि इथेनॉल और बिजली का उत्पादन भी होगा ताकि ये आर्थिक रूप से मजबूत रहें। इससे राज्य में लाखों लोगों को सीधा रोजगार मिलने की उम्मीद है।


Puja Kanjani Covers Bhagalpur Local Updates and Bihar Level Important News. Ex Jagran Media and IndiaTV Journalist.

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