भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित प्रसिद्ध बाबा अजगैवीनाथ मंदिर का कायाकल्प होने जा रहा है। उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित इस मंदिर को अब पर्यटन के लिहाज से और भी आकर्षक बनाया जाएगा। नगर परिषद ने यहाँ राजगीर की तर्ज पर एक शानदार ग्लास ब्रिज (Glass Bridge) बनाने का फैसला लिया है। पटना से आई तकनीकी टीम और स्थानीय अधिकारियों ने 11-12 फरवरी को स्थल का निरीक्षण कर लिया है और प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है।
मंदिर परिसर में क्या-क्या नया बनेगा?
इस प्रोजेक्ट के तहत केवल ग्लास ब्रिज ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे परिसर को नया रूप दिया जा रहा है। नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की मौजूदगी में निरीक्षण के दौरान कई अहम फैसले लिए गए। नई सुविधाओं में शामिल हैं:
- भव्य प्रवेश द्वार: दो अलग-अलग दिशाओं में शानदार नक्काशी वाले बड़े गेट बनेंगे।
- बुजुर्गों के लिए सीढ़ियां: मंदिर की खड़ी सीढ़ियों को तोड़कर उनकी ऊंचाई कम की जाएगी ताकि बुजुर्ग आसानी से चढ़ सकें।
- दिव्यांगों के लिए रैंप: मुख्य गेट और VIP गेट दोनों जगह रैंप की सुविधा दी जाएगी।
- पार्क और पार्किंग: परिक्रमा पथ के बीच में एक सुंदर पार्क बनेगा और मुख्य गेट के पास गाड़ियों के लिए पार्किंग बनाई जाएगी।
- रास्ते का सुधार: अजगैवीनाथ और पार्वती मंदिर के बीच के रास्ते को भी आधुनिक बनाया जाएगा।
कब से शुरू होगा काम?
प्रशासन ने इस काम को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, महाशिवरात्रि (16 फरवरी 2026) के तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की DPR (विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अपने अंतिम चरण में है। अधिकारियों का प्रयास है कि जुलाई 2026 में शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला से पहले मुख्य निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले कांवरियों और पर्यटकों को नई सुविधाएं मिल सकें।
टिकट और नियम कैसे होंगे?
सुल्तानगंज ग्लास ब्रिज के लिए अभी टिकट के दाम या नियम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुए हैं। हालांकि, चूँकि इसे राजगीर मॉडल पर बनाया जा रहा है, इसलिए वहां की व्यवस्था को एक मानक माना जा सकता है। राजगीर में बेस एंट्री फीस और ग्लास स्काईवॉक का चार्ज अलग-अलग होता है, जो सामान्य आम आदमी के बजट में रहता है। सुरक्षा कारणों से एक बार में ब्रिज पर सीमित संख्या (लगभग 40 लोग) को ही जाने की अनुमति दी जा सकती है।






