बिहार के बांका जिले में न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम अब तेज हो गया है। इसके लिए शंभूगंज और भीतिया (फुल्लीडुमर) की पथरीली जमीन को सबसे उपयुक्त पाया गया है। प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी, जिसके लिए अब सुल्तानगंज से गंगा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए कोझी डैम तक लाने की योजना बनाई जा रही है। हाल ही में पटना के विद्युत भवन में अधिकारियों ने एक अहम बैठक में इस पर चर्चा की है।

शंभूगंज और भीतिया ही क्यों चुने गए?

न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और एनटीपीसी की टीमों ने पिछले छह महीनों में इन जगहों का गहन सर्वे किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शंभूगंज और भीतिया की जमीन काफी पथरीली है और यहाँ आसपास घनी आबादी नहीं है। न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा के नियमों के अनुसार ऐसी ही जगह सबसे सुरक्षित मानी जाती है। पटना में हुई बैठक में एनर्जी सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह ने इन रिपोर्टों की समीक्षा की है और इसे प्रोजेक्ट के लिए सही बताया है।

पानी की समस्या का क्या है हल?

न्यूक्लियर प्लांट को चलाने और ठंडा रखने के लिए लगातार भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। बांका में पानी की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब इसका समाधान निकाल लिया गया है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सुल्तानगंज से गंगा का पानी लाने का संकेत दिया है।

योजना के तहत सुल्तानगंज से एक विशेष पाइपलाइन बिछाकर गंगाजल को फुल्लीडुमर के कोझी डैम में जमा किया जाएगा। बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी ने इसके लिए जल संसाधन विभाग से बात शुरू कर दी है ताकि पाइपलाइन और डैम का काम सही तरीके से प्लान किया जा सके।

स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?

अगर यह प्रोजेक्ट बांका में लगता है, तो यह बिहार का पहला अपना न्यूक्लियर पावर प्लांट होगा। इससे बिहार को बिजली के मामले में दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आम लोगों के लिए बिजली सस्ती भी हो सकती है। स्थानीय विधायक जयंत राज कुशवाहा और मनोज यादव सरकार से लगातार संपर्क में हैं ताकि पानी की पाइपलाइन का काम जल्दी शुरू हो और प्रोजेक्ट बांका से बाहर न जाए। फिलहाल स्थानीय अधिकारी सरकार से जमीन अधिग्रहण के औपचारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।


Puja Kanjani Covers Bhagalpur Local Updates and Bihar Level Important News. Ex Jagran Media and IndiaTV Journalist.

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