नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर भागलपुर के लिए एक खास जानकारी सामने आई है। स्वतंत्रता संग्राम में भागलपुर का योगदान केवल आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आजाद हिंद फौज के गठन और उसके संचालन में भी यहां के सपूतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आज़ाद हिंद फौज के गठन में आनंद मोहन सहाय की बड़ी भूमिका थी

नाथनगर के पुरनी सराय निवासी आनंद मोहन सहाय नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सरपरस्ती में आजाद हिंद फौज की नींव रखने वालों में प्रमुख थे। जापान में फौज के गठन की तैयारी से लेकर नाथनगर स्थित अपने आवास में नेताजी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र क्रांति को दिशा दी थी।

नाथनगर का ‘लाल गुलाब’ था गुप्त गतिविधियों का केंद्र

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि आज़ादी के उस दौर में ‘लाल गुलाब’ नाम का एक स्थान गुप्त गतिविधियों का सशक्त केंद्र था। ‘लाल गुलाब’ से उठी क्रांति की चिंगारी ने कई युवकों को आजाद हिंद फौज की गोपनीय मुहिम से जोड़ा था।

जहाजी भाई और सहाय परिवार का अमूल्य योगदान

इसी क्रम में नाथनगर के पड़ौसी नरगा मोहल्ले के जहाजी भाई मीर मुर्तजा और मीर मुबारक का नाम सामने आता है। ब्रिटिश शासन के अधीन नौकरी में रहते हुए भी दोनों भाई गुप्त रूप से नेताजी के मिशन में सक्रिय थे। टीपीएनबी कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रविशंकर चौधरी ने बताया कि आनंद मोहन सहाय का पूरा परिवार देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत था। उनकी पत्नी सती सेन और पुत्री भारती चौधरी उर्फ आशा सहाय ने भी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आशा सहाय का जन्म 1928 में जापान के कोबे शहर में हुआ था। वह 15 साल की उम्र में नेताजी से मिलीं और 17 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट में शामिल हो गई थीं।

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