भागलपुर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या से बड़ी राहत मिलने वाली है। कहलगांव से सबौर ग्रिड और सुल्तानगंज से बांका ग्रिड के बीच 1.32 लाख वोल्ट की पुरानी बिजली तारों को बदलने का काम जोरों पर है। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (BSPTCL) के अनुसार यह काम 15 अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद सब-स्टेशनों को बिना किसी रुकावट के बिजली मिलेगी।
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बिजली सुधार प्रोजेक्ट और नई लाइनों की जानकारी
इस प्रोजेक्ट के तहत सालों पुराने जर्जर तारों को हटाया जा रहा है ताकि बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाया जा सके। विभाग इस पूरे सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
- कहलगांव से सबौर: यहां NTPC से सबौर ग्रिड तक लगभग 31.5 किलोमीटर लंबी लाइन बदली जा रही है।
- सुल्तानगंज से बांका: सुल्तानगंज ग्रिड से बांका पावर ग्रिड तक 46.5 किलोमीटर की दूरी में नई तारें बिछाई जा रही हैं।
- आधुनिक तकनीक: इन लाइनों में HTLS (High-Temperature Low-Sag) कंडक्टर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है जो ज्यादा लोड सह सकते हैं।
- अमरपुर नया ग्रिड: बांका के अमरपुर में 180 MW क्षमता का एक नया ग्रिड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों को फायदा होगा।
- प्रोजेक्ट लागत: इन सभी कार्यों पर सरकार लगभग 199 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च कर रही है।
आम जनता को मिलने वाले मुख्य फायदे
पुरानी तारों के कारण बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन और बिजली की बर्बादी अब बीते दिनों की बात हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होते ही सिस्टम में स्थिरता आएगी।
मौजूदा समय में बिजली की तारें करीब 12 से 15 साल पुरानी हो चुकी थीं, जिसकी वजह से अक्सर तार टूटने की घटनाएं होती थीं। पुरानी लाइनों की वजह से करीब 3 से 4 प्रतिशत बिजली का नुकसान होता था, जिसे अब रोका जा सकेगा। इसके अलावा, अभी मामूली झटके या आंधी आने पर भी ग्रिड बंद हो जाता था, लेकिन नई तारें लगने के बाद ग्रिड बार-बार फेल नहीं होगा।
अमरपुर में बनने वाले नए ग्रिड से करीब 140 MW तक की बिजली सब-स्टेशनों को भेजी जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, काम की गति काफी तेज है और अगले 10-15 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।






