भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) में पिछले 12 दिनों से एमआरआई जांच सेवा पूरी तरह से बंद है। एमआरआई केंद्र के संचालक ने इसके पीछे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को मुख्य कारण बताया है। संचालक का दावा है कि युद्ध की वजह से हीलियम गैस की सप्लाई रुक गई है, जो एमआरआई मशीन के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन को यह दलील गले नहीं उतर रही है और अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
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मरीजों को क्यों उठानी पड़ रही है भारी परेशानी?
अस्पताल में एमआरआई सेवा बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभाव उन मरीजों पर पड़ रहा है जो गंभीर बीमारियों या एक्सीडेंट के बाद इलाज के लिए भर्ती हैं। डॉक्टरों द्वारा एमआरआई की सलाह दिए जाने पर परिजनों को मजबूरी में बाहर जाना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को स्ट्रेचर और निजी वाहनों के जरिए बाहर ले जाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
- बड़ा आर्थिक बोझ: अस्पताल में एमआरआई जांच का शुल्क करीब 4,000 रुपये था, लेकिन निजी केंद्रों पर मरीजों से 14,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
- समय की बर्बादी: मरीजों को जांच के लिए दो महीने बाद आने को कहा जा रहा है, जिससे इलाज में देरी हो रही है।
- प्रशासनिक कार्यवाही: अस्पताल अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे ने शनिवार को ही जांच का मन बनाया था, लेकिन छुट्टियों के कारण अब सोमवार को निरीक्षक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे।
क्या वाकई देश में है हीलियम गैस की कमी?
एक तरफ जहां अस्पताल के एमआरआई संचालक गैस की कमी का रोना रो रहे हैं, वहीं शहर के निजी एमआरआई केंद्रों की कहानी कुछ और ही है। निजी संचालकों का कहना है कि देश में हीलियम गैस की कोई कमी नहीं है और ऑर्डर देने के मात्र दो घंटे के भीतर गैस उपलब्ध हो जाती है। अस्पताल प्रबंधक सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि सोमवार को इस बात की भी जांच होगी कि शहर के अन्य सेंटरों में सेवाएं कैसे चल रही हैं।
| अधिकारी का नाम | पद | ताजा अपडेट |
|---|---|---|
| डॉ. एचपी दुबे | अधीक्षक | जांच के आदेश जारी किए |
| सुनील कुमार गुप्ता | मैनेजर | सोमवार को केंद्र का दौरा करेंगे |
| डॉ. सचिन कुमार सिंह | एचओडी (रेडियोलॉजी) | सेवा बंद होने की जानकारी दी |
विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनी और संचालक के बीच भुगतान को लेकर विवाद होने पर भी हीलियम की सप्लाई में देरी की जाती है। अब सोमवार को होने वाली जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हीलियम की कमी असली है या यह केवल एक बहाना है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।






