केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने भागलपुर को एक बड़ा तोहफा दिया है. रेल मंत्रालय ने भागलपुर रेल बाईपास लाइन निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिससे शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को काफी लाभ मिलेगा. यह परियोजना भागलपुर स्टेशन पर ट्रेनों के दबाव को कम करेगी और यात्रा को सुगम बनाएगी. भाजपा प्रवक्ता डॉ. प्रीति शेखर ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद किया है. उन्होंने गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की भूमिका की भी सराहना की.
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क्या है भागलपुर रेल बाईपास परियोजना?
यह 13.38 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास परियोजना लगभग 303.20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनेगी. रेल मंत्रालय ने लगभग 24-26 मार्च, 2026 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी और 27 मार्च, 2026 को इसकी जानकारी कई समाचारों में दोहराई गई है. पूर्वी रेलवे इस बाईपास का विकास करेगी. यह बाईपास बरहट-भागलपुर रेलखंड पर स्थित गोनूधाम हॉल्ट को भागलपुर-साहिबगंज रेलखंड के सबौर स्टेशन से जोड़ेगा.
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को कैसे होगा लाभ?
इस रेल बाईपास के बनने से भागलपुर जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा, क्योंकि वर्तमान में यह खंड अपनी क्षमता से 125 प्रतिशत से अधिक उपयोग में है. इससे ट्रेनों का संचालन सुचारू होगा और समयबद्धता में सुधार होगा. बाईपास बनने के बाद भागलपुर जंक्शन पर ट्रेनों को इंजन बदलने की समस्या खत्म हो जाएगी, जिससे समय की बचत होगी. यह यात्री और मालगाड़ियों दोनों के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा. इसके अलावा, परियोजना से क्षेत्र में रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भागलपुर का समग्र विकास तेजी से होगा. सबौर स्टेशन का विकास अमृत भारत योजना के तहत भी किया जा रहा है और गोनूधाम जैसे धार्मिक स्थलों को भी इस परियोजना से लाभ मिलेगा.






