बिहारशरीफ के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ की घटना के बाद अब भागलपुर के प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि जिले के कई मंदिरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं हैं। यहां सुरक्षा के नाम पर केवल CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जबकि संकरी गलियां और Emergency Exit की कमी किसी बड़े खतरे को दावत दे रही है।
👉: बिहार में बिजली बिल का नया नियम: दिन में सस्ती और शाम को महंगी मिलेगी बिजली, जानिए नया रेट चार्ट।
DGP के आदेश और सुरक्षा के नए मानक
बिहार के DGP Vinay Kumar ने प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा ऑडिट कराने का सख्त निर्देश दिया है। इसके तहत पुलिस अधिकारियों को भीड़भाड़ वाले इलाकों की पहचान करने और वहां सुरक्षा इंतजामों की जांच करने को कहा गया है। मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
- मंदिरों में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्तों की व्यवस्था।
- आग लगने या भगदड़ की स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन निकास की उपलब्धता।
- भीड़ को रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती।
- श्रद्धालुओं के रुकने के लिए होल्डिंग एरिया का निर्माण।
भागलपुर के मंदिरों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
भागलपुर के बाबा भूतनाथ मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के सामने संकरी गलियों में भीड़ को संभालना एक बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहारशरीफ भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को 6 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। भागलपुर में भी पूर्व में मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं, जिसे देखते हुए सुरक्षा ऑडिट को काफी अहम माना जा रहा है। नगर निगम ने कुछ मंदिरों के पास सड़क चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।






