नई दिल्ली में 3 फरवरी 2026 को भारत के समुद्री व्यापार के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। देश में ‘The Bharat Container Shipping Line’ (BCSL) नाम से एक नई सरकारी कंपनी बनाने के लिए समझौता हुआ है। इसके लिए छह बड़ी सरकारी संस्थाओं ने आपस में हाथ मिलाया है। इस नई कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत के लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर को मजबूत करना है ताकि देश को विदेशी जहाजों पर निर्भर न रहना पड़े।
कौन सी कंपनी की कितनी होगी हिस्सेदारी
इस ज्वाइंट वेंचर में Shipping Corporation of India और Container Corporation of India सबसे बड़े भागीदार होंगे। यह सभी कंपनियां मिलकर एक कंसोर्टियम की तरह काम करेंगी। नई कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी, इसका विवरण नीचे दिया गया है:
- The Shipping Corporation of India Ltd. (SCI): 30%
- Container Corporation of India Ltd. (CONCOR): 30%
- Sagarmala Finance Corporation Ltd. (SMFCL): 20%
- Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPA): 10%
- Chennai Port Authority (CPA): 5%
- V.O. Chidambaranar Port Authority: 5%
आम आदमी और व्यापार को कैसे होगा फायदा
इस समझौते का सीधा असर देश के आयात और निर्यात यानी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर पड़ेगा। अभी तक भारत को अपना माल बाहर भेजने या मंगाने के लिए विदेशी शिपिंग लाइनों का सहारा लेना पड़ता था। The Bharat Container Shipping Line अब अपने खुद के जहाज खरीदेगी और किराए पर भी लेगी। इससे माल ढुलाई की लागत स्थिर रखने में मदद मिलेगी और भारतीय व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
सरकार के ‘सागरमाला’ कार्यक्रम के तहत यह पहल की गई है। इसमें Shipping Corporation of India जहाजों के संचालन का काम देखेगी, जबकि Container Corporation of India अपने बड़े नेटवर्क के जरिए जमीनी लॉजिस्टिक्स संभालेगी। यह कंपनी सिर्फ समुद्र ही नहीं बल्कि सड़क और रेल के जरिए भी सामान को बंदरगाह तक पहुंचाने का पूरा इंतजाम करेगी।






