बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. 1 अप्रैल 2026 से राज्य में बिजली बिल का नया स्ट्रक्चर लागू होने जा रहा है, जो 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा. बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) द्वारा 15 या 16 मार्च को इस पर अंतिम फैसला सुनाया जा सकता है. बिजली कंपनियों द्वारा दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक, इस बदलाव का असर शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के उपभोक्ताओं पर अलग-अलग पड़ने वाला है.
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शहरी और ग्रामीण इलाकों के बिल में क्या बदलाव होगा?
बिजली कंपनियों ने सभी तरह के उपभोक्ताओं के लिए बेस रेट में करीब 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि अलग-अलग स्लैब को मर्ज करने का विचार किया जा रहा है. अभी शहर में 100 यूनिट तक 7.42 रुपये और उससे ऊपर 8.95 रुपये का रेट लगता है. नए प्रस्ताव में इसे एक करके 7.77 रुपये प्रति यूनिट करने की बात कही गई है.
शहरी क्षेत्रों में जिन घरों में बिजली की खपत ज्यादा है, उन्हें इस बदलाव से फायदा हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ, ग्रामीण इलाकों में पहले से ही सिंगल स्लैब सिस्टम लागू है, इसलिए वहां स्लैब मर्ज करने का कोई फायदा नहीं मिलेगा. ऐसे में अगर रेट बढ़ता है, तो ग्रामीण उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है.
किसानों और छोटे दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा?
इस नए प्रस्ताव में छोटे दुकानदारों को थोड़ी राहत देने की योजना बनाई गई है. 0.5 किलोवाट तक के लोड वाले छोटे दुकानदारों का फिक्स चार्ज 200 रुपये से घटाकर 150 रुपये किया जा सकता है. कमर्शियल कनेक्शन के लिए भी शहरी और ग्रामीण दोनों जगहों पर स्लैब को एक रेट में बदलने का प्रस्ताव रखा गया है.
किसानों के लिए खबर थोड़ी चिंताजनक हो सकती है. सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली की दर को 6.74 रुपये से बढ़ाकर 7.09 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव दिया गया है. आयोग ने पटना, बेगूसराय और गया में जनसुनवाई पूरी कर ली है और फिलहाल तथ्यों की जांच की जा रही है.
बिजली के दाम बदलने की मुख्य वजह क्या है?
इस बार बिजली दरों में बदलाव की सबसे बड़ी वजह अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) का एक आदेश है. यह मामला साल 2012 का है जब बिजली बोर्ड का पुनर्गठन हुआ था. उस समय की पुरानी बकाया राशि और उस पर बने ब्याज को चुकाने के लिए बिजली कंपनियों पर दबाव है.
कंपनियों को करीब 1100 करोड़ रुपये का मूल बकाया और ब्याज चुकाना है. राज्य सरकार ने अभी तक इस पुरानी देनदारी को नहीं उठाया है, इसलिए बिजली कंपनियां इस खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं के बिल के जरिए करना चाहती हैं. अंतिम फैसला मार्च के मध्य में आयोग के चेयरमैन आमिर सुबहानी द्वारा जारी किया जाएगा.






