बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर नीतीश सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य के मुखिया, सरपंच और अन्य त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस समय पर मिलेगा। सरकार ने सभी जिलों के DM को कड़ा निर्देश दिया है कि आवेदन मिलने के 60 दिनों के अंदर लाइसेंस पर हर हाल में फैसला लेना होगा। इस फैसले से उन प्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें रात के समय ग्रामीण इलाकों में काम के दौरान अपराधियों से जान का खतरा रहता है।

नया नियम क्या है और DM को क्या करना होगा

नए नियम के तहत अब हथियार के लाइसेंस का आवेदन सालों तक कार्यालयों में पेंडिंग नहीं रहेगा। बिहार के गृह विभाग ने सभी 38 जिलों के DM को पत्र लिखकर साफ कहा है कि 60 दिन के भीतर पंचायत प्रतिनिधियों के आवेदन का निपटारा करना होगा। इसके साथ ही अब हर महीने गृह विभाग को एक रिपोर्ट भी भेजनी होगी। इस रिपोर्ट में DM को यह स्पष्ट बताना होगा कि उनके पास कितने आवेदन आए, कितने पास हुए और कितने अभी पेंडिंग हैं। डिप्टी CM और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया है कि DM स्तर पर अब किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुरक्षा का कारण और पुलिस वेरिफिकेशन

हाल के समय में बेगूसराय और लखीसराय जैसे जिलों में मुखिया की हत्या के मामले सामने आए थे। इसके बाद विधानसभा में कई विधायकों ने यह मुद्दा उठाया था कि प्रतिनिधियों के लाइसेंस आवेदन 1 से 2 साल तक पेंडिंग रह जाते हैं, जिससे उन्हें काम करने में डर बना रहता है। इसी कारण से सरकार ने 60 दिन की सख्त समय सीमा तय की है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि लाइसेंस देने से पहले आर्म्स एक्ट के तहत पुलिस बैकग्राउंड चेक और वेरिफिकेशन का पुराना नियम पूरी सख्ती से लागू रहेगा। इसके अलावा लाइसेंस के लिए लगने वाली फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ है और आवेदकों को सिर्फ सामान्य सरकारी फीस ही जमा करनी होगी।


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