बिहार सरकार सात निश्चय-3 योजना के तहत राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला ले रही है। अब सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने की तैयारी है। इसके लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है जो इस बदलाव के असर और डॉक्टरों को दिए जाने वाले फायदों पर अपनी रिपोर्ट देगी।
डॉक्टरों को मिलने वाले भत्ते और सुविधाएं
सरकार ने डॉक्टरों का मनोबल बनाए रखने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा है। प्राइवेट प्रैक्टिस छोड़ने के बदले डॉक्टरों को आर्थिक और पेशेवर फायदे दिए जाएंगे।
- NPA (Non-Practicing Allowance): डॉक्टरों को उनकी बेसिक सैलरी का 20 प्रतिशत भत्ता दिया जाएगा।
- प्रमोशन में फायदा: प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करने वाले डॉक्टरों को सीनियरिटी और प्रमोशन में प्राथमिकता मिलेगी।
- ग्रामीण पैकेज: दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया जा रहा है।
- आवास सुविधा: डॉक्टरों के लिए सरकारी आवास और कार्यस्थल पर आधुनिक मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी।
दलालों पर नकेल और नई कमेटी का काम
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक भेजने वाले दलालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश के अनुसार सभी जिलों में ‘धावा दल’ बनाया गया है जो औचक निरीक्षण करेगा।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कमीटी का गठन | 28 जनवरी 2026 |
| कमीटी के सदस्य | 6 सदस्य (PMCH, NMCH और IGIMS के विशेषज्ञ शामिल) |
| सात निश्चय-3 लक्ष्य | सुलभ स्वास्थ्य—समृद्ध जीवन |
| मुख्य अधिकारी | स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह |
सरकार का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना और आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर मजबूत करना है। अगर कोई डॉक्टर ड्यूटी के घंटों के दौरान प्राइवेट प्रैक्टिस या किसी सिंडिकेट में शामिल पाया जाता है तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






