बिहार में आज से यानी 1 अप्रैल से जमीन और फ्लैट खरीदना काफी महंगा हो गया है। सरकार ने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (MVR) यानी सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। इस बदलाव से अब जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री कराते समय लोगों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। पटना और भागलपुर जैसे बड़े शहरों में इसके रेट में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
कितनी बढ़ी है जमीन की कीमतें और क्या होगा असर?
बिहार के अलग-अलग जिलों में सर्किल रेट में 2 से 4 गुना तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब है कि जिस रजिस्ट्री के लिए पहले 10,000 रुपये खर्च होते थे, अब वहां 40,000 रुपये तक देने पड़ सकते हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और बाजार मूल्य के बीच के अंतर को खत्म करना है। पटना के बोरिंग रोड जैसे प्रीमियम इलाकों में सर्किल रेट 40 लाख रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच गया है।
रजिस्ट्री के नए नियम और खास सुविधाएं
- बिहार के शहरी क्षेत्रों में आखिरी बार 2016 में और ग्रामीण क्षेत्रों में 2013 में रेट बदले गए थे।
- अब निबंधन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ई-पोर्टल पर 13 बिंदुओं की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
- 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए सरकार ने 400 रुपये की फीस पर घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा दी है।
- बढ़ते दामों की आशंका में पिछले कुछ दिनों में रजिस्ट्री कार्यालयों में लोगों की भारी भीड़ देखी गई थी।
आम आदमी के बजट पर कैसे पड़ेगा असर?
सर्किल रेट बढ़ने का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो अपना घर बनाने का सपना देख रहे हैं। रजिस्ट्री के दौरान स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ जाने से प्रॉपर्टी खरीदने का कुल बजट बढ़ जाएगा। जानकारों का कहना है कि शुरुआत में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में थोड़ी सुस्ती आ सकती है, लेकिन इससे भविष्य में जमीन के कारोबार में ज्यादा पारदर्शिता आने की उम्मीद है। हालांकि पटना रजिस्ट्री ऑफिस में फिलहाल आधिकारिक आदेश का इंतजार करने की बात भी सामने आई है।






