बिहार सरकार ने राज्य में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब नेपाल बॉर्डर से वैद्यनाथ धाम और बगहा से बक्सर तक दो नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान इसकी जानकारी दी है। इन सड़कों के बनने से बिहार के कई जिलों में आवागमन सुगम हो जाएगा और लोग कम समय में लंबी दूरी तय कर सकेंगे।
पशुपतिनाथ-वैद्यनाथ कॉरिडोर का रूट क्या होगा?
पहला बड़ा प्रोजेक्ट पशुपतिनाथ-वैद्यनाथ हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसकी लंबाई करीब 250 किलोमीटर होगी। यह रास्ता नेपाल के काठमांडू से शुरू होकर सुपौल के भीमनगर और बीरपुर के रास्ते बिहार में आएगा। इसके बाद यह मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका होते हुए झारखंड के देवघर तक जाएगा। खास बात यह है कि सुल्तानगंज से देवघर के बीच कांवड़ियों के लिए एक अलग सर्विस रोड भी बनाई जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
नारायणी-गंगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में क्या खास है?
दूसरा प्रस्ताव नारायणी-गंगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का है, जो करीब 225 किलोमीटर लंबा होगा। यह बगहा से शुरू होकर सिवान और सारण होते हुए भोजपुर के पतर तक जाएगा। वहां से यह पटना-आरा-सासाराम हाई-स्पीड कॉरिडोर से जुड़ जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 15,450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसमें गंडक नदी पर एक नया पुल भी बनाया जाएगा। सरकार ने इन दोनों कॉरिडोर के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है।
आम लोगों को इन सड़कों से क्या फायदा मिलेगा?
सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि बिहार के किसी भी कोने से लोग 4 घंटे के भीतर पटना पहुंच सकें। इसके लिए हाइब्रिड एनुइटी मॉडल के तहत काम किया जाएगा। साथ ही, सरकार ने फैसला किया है कि राज्य की सभी सिंगल लेन सड़कों को कम से कम दो लेन में बदला जाएगा। इस योजना से पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सहरसा और मुंगेर जैसे जिलों में रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे।






