भारतीय रेलवे ने पटरी पार करते समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। बिहार सहित पूरे देश में अब उन जगहों पर रेल पुलिया (सबवे) बनाई जाएंगी जहाँ लोग अक्सर पटरियां पार करने को मजबूर होते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस काम को पूरा करने में रेलवे सिर्फ 12 घंटे का समय लेगा। रेलवे मंत्रालय का लक्ष्य है कि अगले 5 से 6 सालों के भीतर देश के अधिकांश हिस्सों में इस समस्या का समाधान कर दिया जाए।
कैसे मात्र 12 घंटे में तैयार होगी यह पुलिया?
इस आधुनिक तकनीक के तहत पुलिया का ढांचा पहले से ही एक कास्टिंग यार्ड में बनाकर तैयार रखा जाता है। जब काम शुरू होता है, तब रेल ट्रैफिक को कुछ घंटों के लिए रोककर पटरियों के नीचे इस प्री-कास्ट ढांचे को फिट कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 12 घंटे का ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाता है। हाजीपुर रेलवे जोन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि इस तकनीक से काम करने पर ट्रेनों के आवागमन में ज्यादा बाधा नहीं आती है और निर्माण कार्य भी बहुत जल्दी पूरा हो जाता है।
आम लोगों को इस प्रोजेक्ट से क्या लाभ मिलेंगे?
रेलवे की इस पहल से पैदल यात्रियों, साइकिल और मोटरसाइकिल सवारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। अब उन्हें जान जोखिम में डालकर पटरी पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ खास नियम भी तय किए हैं:
- पुलिया का डिजाइन ऐसा होगा जिससे बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या न हो।
- स्थानीय प्रशासन की मदद से उन जगहों की पहचान की जा रही है जहाँ लोग खेतों, स्कूलों या बाजार जाने के लिए पटरी पार करते हैं।
- आरा जंक्शन और भागलपुर जैसे इलाकों में भी इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम चल रहा है।
- रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने अधिकारियों को इसे मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
इस प्रोजेक्ट पर आने वाला खर्च हर लोकेशन के आधार पर अलग हो सकता है, लेकिन हाल के अन्य अंडरपास प्रोजेक्ट्स का औसत खर्च 6 करोड़ से 8 करोड़ रुपये के बीच देखा गया है।






