वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपना 9वां बजट पेश करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी घोषणा की है। सरकार ने ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना के तहत बायोफार्मा सेक्टर को 10,000 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। यह राशि अगले 5 सालों में खर्च की जाएगी। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इससे गंभीर बीमारियों का इलाज सस्ता होने की उम्मीद है। रविवार को पेश हुए इस बजट में सरकार का जोर भारत को दवा निर्माण का ग्लोबल हब बनाने पर है।

कैंसर और शुगर की दवाएं होंगी सस्ती

सरकार का मुख्य उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं का उत्पादन देश में ही बढ़ाना है। जब ये दवाएं भारत में ही ज्यादा मात्रा में बनेंगी, तो इनकी कीमतें कम होंगी। इससे कैंसर, मधुमेह (Diabetes) और ऑटो-इम्यून जैसी बीमारियों के मरीजों को काफी राहत मिलेगी। अभी इन बीमारियों का इलाज काफी महंगा होता है, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ने से दवाइयां सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकेंगी। गैर-संचारी रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

रिसर्च सेंटर और क्लिनिकल ट्रायल का नेटवर्क बनेगा

इस योजना के तहत देश में रिसर्च और डेवलपमेंट को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार ने 3 नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) खोलने का फैसला किया है, जबकि 7 पुराने संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा पूरे भारत में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक नेटवर्क तैयार होगा। दवाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए CDSCO को भी वैश्विक मानकों के हिसाब से सुधारा जाएगा।

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