बक्सर से भागलपुर जाने वाले नए एक्सप्रेस-वे पर अब लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे। भारतीय वायुसेना (IAF) और NHAI की टीम ने इसके लिए जमीनी स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया है। मोकामा और मुंगेर के बीच बन रहे 82.44 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन पर 5 किलोमीटर की सीधी सड़क खोजी जा रही है। यहाँ Rafale, Mirage 2000 और Sukhoi-30 MKI जैसे ताकतवर विमान इमरजेंसी लैंडिंग कर सकेंगे।

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कैसी होगी सड़क की बनावट?

वायुसेना को विमान उतारने के लिए कम से कम 5 किलोमीटर का बिल्कुल सीधा रास्ता चाहिए। इंजीनियरों ने बताया है कि इस हिस्से में बीच में कोई डिवाइडर नहीं होगा। साथ ही, बिजली के खंभे और पेड़-पौधे भी सड़क से दूर रखे जाएंगे ताकि विमान के पंखों को कोई नुकसान न हो। यह पूरा प्रोजेक्ट मोकामा-मुंगेर सेक्शन का हिस्सा है, जिसकी कुल लागत करीब 4,447 करोड़ रुपये आंकी गई है।

काम शुरू होने में क्यों हो रही देरी?

सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी बड़े रोड प्रोजेक्ट का काम तभी शुरू हो सकता है जब 90% जमीन का अधिग्रहण (Land Acquisition) पूरा हो जाए। फिलहाल इसी प्रक्रिया में समय लग रहा है। इसके पहले एकचारी-महागामा (NH 133) रूट पर भी एयरस्ट्रिप बनाने की बात थी, लेकिन वहाँ छोटे पुल और कलवर्ट होने के कारण वायुसेना ने उसे असुरक्षित बताकर रद्द कर दिया था। अब सारा फोकस बक्सर-भागलपुर रूट पर है।

बिहार के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

इस एक्सप्रेस-वे के बनने से बक्सर से भागलपुर और मुंगेर का सफर जो अभी 10 घंटे का है, वह घटकर मात्र 1.5 से 2 घंटे का रह जाएगा। सामरिक दृष्टि से भी यह बहुत अहम है क्योंकि यह सड़क वायुसेना के नक्शे में शामिल होगी। जरूरत पड़ने पर या एयर फोर्स डे (Air Force Day) के मौके पर यहाँ फाइटर जेट्स का प्रदर्शन भी देखा जा सकेगा। बिहटा और गोरखपुर एयरबेस पास होने की वजह से यह सड़क वायुसेना के लिए एक ‘शैडो रनवे’ का काम करेगी।


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