भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र स्थित ओंकार अपार्टमेंट में स्वास्थ्य जांच के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ एक हेल्थ कैंप लगाकर करीब दो दर्जन परिवारों से खून जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली गई। बाद में लोगों को जो रिपोर्ट दी गई, वह पूरी तरह फर्जी निकली। इस मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों ने बताया कि रिपोर्ट देखकर वे घबरा गए थे, लेकिन दूसरी जगह जांच कराने पर सच सामने आया।

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कैसे हुआ ठगी का यह पूरा खेल?

आरोपी कुमार शिवम ने खुद को एक लैब का मैनेजर बताकर सोसायटी के सचिव से संपर्क किया था। उसने 1 फरवरी 2026 को अपार्टमेंट में कैंप लगाने की अनुमति ली। लोगों को स्वास्थ्य जांच के लिए अलग-अलग पैकेज का झांसा दिया गया। अपार्टमेंट के लगभग 24 परिवारों ने इस कैंप में अपनी जांच करवाई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जांच के नाम पर हर फ्लैट से औसतन 6,000 रुपये वसूले गए। ठगों ने कुल मिलाकर 50,000 रुपये से ज्यादा की राशि जमा कर ली। पैसे लेने के बाद अगले दिन जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें कई गड़बड़ियाँ थीं, जिसने लोगों के मन में शक पैदा कर दिया।

दूसरी लैब में जांच कराने पर खुली पोल

जब रिपोर्ट आई तो कई लोगों के होश उड़ गए। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की पत्नी सोनम कुमारी को रिपोर्ट में बढ़ा हुआ थायराइड बताया गया। वहीं, बैंक अधिकारी आशीष झा को खतरनाक स्तर का कोलेस्ट्रॉल दिखाया गया। इतनी गंभीर बीमारी की बात सुनकर ये लोग परेशान हो गए।

शक होने पर जब इन लोगों ने शहर की दूसरी प्रतिष्ठित लैब में दोबारा जांच कराई, तो सभी की रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य (Normal) निकली। पीड़ितों ने गौर किया कि उन्हें दी गई पहली रिपोर्ट पर किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर ही नहीं थे। जब उन्होंने आरोपी कुमार शिवम को फोन किया, तो उसने डिजिटल तरीके से रिपोर्ट एडिट कर डॉक्टर का नाम जोड़कर भेज दिया।

पुलिस ने शुरू की जांच, पहले भी हो चुका है ऐसा

ठगी का शिकार हुए लोगों ने 11 फरवरी को बरारी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब उस लैब और आरोपी मैनेजर की जांच कर रही है। समाचारों के अनुसार, इससे पहले सबौर इलाके में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा देखने को मिला था, जिससे यह एक गिरोह का काम लगता है।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी भी रिपोर्ट पर प्रमाणित डॉक्टर (MBBS/MD) के हस्ताक्षर होना जरूरी है। बिना हस्ताक्षर या एडिट की गई रिपोर्ट कानूनी रूप से अवैध है। पुलिस अब Clinical Establishments Act के तहत मामले की पड़ताल कर रही है ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।


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