बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। करीब 17 सालों के लंबे इंतजार के बाद जलालगढ़-किशनगंज नई रेललाइन परियोजना फिर से पटरी पर लौटती दिख रही है। रेलवे ने इस 51 किलोमीटर लंबी लाइन के लिए एक नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करके रेलवे बोर्ड को भेज दी है। अब इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 1852 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिससे इस इलाके के विकास को नई गति मिलेगी।

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सीमांचल के लोगों को इस रेललाइन से क्या फायदा होगा?

इस रेललाइन के बनने से सीमांचल के सामाजिक और आर्थिक विकास को काफी बढ़ावा मिलेगा। यह लाइन कटिहार और किशनगंज के बीच की दूरी को कम कर देगी और पूर्णिया प्रमंडल को सीधे एक मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ देगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि NJP की ओर से आने वाली ट्रेनें सीधे पूर्णिया होकर कटिहार जा सकेंगी। इसके अलावा, जलालगढ़, अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी यातायात सुगम हो जाएगा।

परियोजना में क्या नया अपडेट है और कौन से स्टेशन बनेंगे?

इस नई लाइन पर कुल 8 नए स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें खाताहाट, रौटा और महीनगांव शामिल हैं। पूर्णिया जिले के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि 1928 के बाद यहां कोई नई रेल लाइन नहीं बिछी है। रणनीतिक रूप से भी यह लाइन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के लिए एक वैकल्पिक रास्ता तैयार करेगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।


Puja Kanjani Covers Bhagalpur Local Updates and Bihar Level Important News. Ex Jagran Media and IndiaTV Journalist.

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