जनता दल (यूनाइटेड) ने बांका से अपने सांसद गिरिधारी यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। 25 मार्च 2026 को पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में एक औपचारिक नोटिस सौंपा है। JDU का आरोप है कि सांसद ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया और चुनाव के दौरान विपक्षी दल RJD के पक्ष में काम किया।
किन आरोपों के चलते हुई यह बड़ी कार्रवाई?
गिरिधारी यादव पर अपनी ही पार्टी के खिलाफ काम करने के कई गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य बिंदुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
- सांसद के बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने बेलहर विधानसभा सीट से JDU विधायक मनोज यादव के खिलाफ RJD के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
- सांसद पर चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टी RJD के लिए प्रचार करने का आरोप है।
- गिरिधारी यादव ने पहले भी EVM विरोधी बयान दिए थे और चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
- JDU सांसद दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष को अयोग्यता से संबंधित औपचारिक शिकायत सौंपी है।
सांसद और विपक्षी नेताओं का क्या है पक्ष?
इस पूरे मामले पर सांसद गिरिधारी यादव ने कहा है कि उन्हें नोटिस मिलने की जानकारी मीडिया से मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और JDU नेतृत्व के प्रति अपनी आस्था जताई है और कहा है कि आधिकारिक सूचना मिलने पर वह अपना जवाब देंगे। दूसरी तरफ RJD सांसद मीसा भारती ने सांसद का बचाव करते हुए कहा कि उनके बेटे वयस्क हैं और उन्हें अपनी इच्छा से चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है।
अयोग्यता से जुड़े क्या हैं कानूनी नियम?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101 से 104 के तहत सांसदों की अयोग्यता के नियम बताए गए हैं। इस मामले में दल-बदल विरोधी कानून यानी संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ काम करता है, तो स्पीकर उसे अयोग्य घोषित कर सकते हैं। इस मामले में अंतिम निर्णय अब लोकसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित है।






