बिहार के लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मेडिकल जर्नल The Lancet की एक नई रिपोर्ट ने बिहार को ‘पॉल्यूशन ट्रैप’ यानी प्रदूषण का जाल बताया है। शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की हवा में PM2.5 का स्तर खतरनाक हद तक बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 100% आबादी ऐसी हवा में सांस ले रही है जो World Health Organization (WHO) के सुरक्षा मानकों से कई गुना खराब है।

हवा में छिपा है साइलेंट किलर

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि बिहार की हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (Fine Particulate Matter) सीधे लोगों की सेहत पर असर डाल रहे हैं। यह कण सांस के जरिए शरीर में जाकर नसों में सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे धमनियों में ब्लॉकेज होने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह प्रदूषण एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करेगा।

अगले 2 सालों में बढ़ सकती हैं बीमारियां

The Lancet ने अपनी स्टडी में आशंका जताई है कि अगले 12 से 24 महीनों में बिहार में गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2028 की शुरुआत तक हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या में उछाल देखने को मिल सकता है। हैरानी की बात यह है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उन्हें भी लंग कैंसर का खतरा बताया गया है।

इन शहरों में हालात सबसे ज्यादा खराब

गंगा के मैदानी इलाकों में बसे शहरों पर प्रदूषण का सबसे बुरा असर पड़ा है। रिपोर्ट में कुछ प्रमुख शहरों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है जहां हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है।

शहर का नाम स्थिति
Patna बेहद खराब
Muzaffarpur चिंताजनक
Gaya PM2.5 की अधिकता
Purnia खतरनाक स्तर

मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित करना चाहिए। हवा में मौजूद प्रदूषण सुपरबग (Superbug) के विकास का भी कारण बन रहा है, जो एंटीबायोटिक दवाओं के असर को कम कर देता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब AQI 200 से ऊपर हो तो लोगों को N95 मास्क का उपयोग करना चाहिए और बाहरी गतिविधियों को सीमित करना चाहिए। फिलहाल बिहार सरकार Graded Response Action Plan (GRAP) के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय कर रही है।

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