मालदा-भागलपुर-किऊल रेलखंड पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय रेलवे ने इस महत्वपूर्ण ट्रैक पर सुरक्षा को बढ़ाते हुए 316.8 किलोमीटर लंबी वी-बीम मेटल फेंसिंग लगाने का काम पूरा कर लिया है। इस सुरक्षा अपग्रेड का मुख्य उद्देश्य ट्रैक पर मवेशियों या बाहरी लोगों के आने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है। इसके साथ ही अब इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार को सुरक्षित तरीके से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाया जा सकेगा।
इन प्रमुख रेलखंडों पर पूरा हुआ सुरक्षा फेंसिंग का काम
पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने इस परियोजना को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर पूरा किया है। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल के कई महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं। फेंसिंग लग जाने से अब ट्रेन संचालन में आने वाली बाधाएं कम होंगी और यात्रियों का सफर पहले से अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
| रेलखंड का नाम | तय की गई लंबाई (किमी) |
|---|---|
| मालदा टाउन – न्यू फरक्का | 62.4 किमी |
| महाराजपुर – विक्रमशिला | 72.4 किमी |
| विक्रमशिला – भागलपुर | 58 किमी |
| भागलपुर – जमालपुर | 52 किमी |
| जमालपुर – किऊल | 50 किमी |
| मालदा – न्यू फरक्का – तीनपहाड़ | 22 किमी |
आधुनिक तकनीक और यात्रियों को मिलने वाले फायदे
यह नई फेंसिंग क्रैश बैरियर तकनीक पर आधारित है जो काफी मजबूत और टिकाऊ है। मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में इस कार्य को गति दी गई है। मंडल रेल विभाग के अनुसार यह फेंसिंग हर मौसम में प्रभावी रहेगी और इसका रखरखाव भी काफी आसान है।
- तेज रफ्तार: 130 किमी प्रति घंटा की गति से ट्रेन चलने पर समय की बचत होगी।
- हादसों में कमी: ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश रुकने से मवेशियों के टकराने की घटनाएं कम होंगी।
- समयपालन: बिना किसी बाहरी रुकावट के ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर चल सकेंगी।
- मजबूत सुरक्षा: रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन की मदद से सुरक्षा को पुख्ता किया गया है।
मालदा रेल मंडल के एपीआरओ रसराज मांझी ने जानकारी दी है कि यह पूरी कवायद ट्रेनों के परिचालन को तेज और भरोसेमंद बनाने के लिए की जा रही है। इससे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच व्यापार और आवागमन और भी सुगम हो जाएगा।






