जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार पुलिस और राज्य सरकार अब इस केस को CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) को सौंपने की तैयारी कर रही है। परिजनों के लगातार विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच यह फैसला लिया जा सकता है। उधर, पटना हाई कोर्ट में 31 जनवरी 2026 को एक जनहित याचिका भी दायर कर दी गई है, जिसमें केस की जांच तुरंत CBI को देने की मांग की गई है।

CBI जांच और DGP से मुलाकात पर अपडेट

पीड़ित छात्रा के माता-पिता ने 30 जनवरी को बिहार के DGP विनय कुमार से मुलाकात की थी। परिजनों ने बाहर आकर बताया कि पुलिस उन पर मामले को आत्महत्या मानने का दबाव बना रही थी। हालांकि, DGP ने उनसे कहा कि अगर वे पुलिस की जांच से खुश नहीं हैं, तो केस CBI को दिया जा सकता है। परिजनों ने यह भी बताया कि अधिकारियों ने उन्हें कहा कि CBI जांच में न्याय मिलने में काफी समय लग सकता है। इसके बावजूद, अब प्रशासन केस ट्रांसफर करने की कागजी प्रक्रिया शुरू करने के मूड में दिख रहा है।

जांच में अब तक क्या-क्या मिला?

इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच में कपड़ों पर वीर्य (Semen) के निशान मिले हैं, जिससे यौन उत्पीड़न की बात साफ हो गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी शरीर पर चोट और नाखूनों के निशान मिले थे। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब DNA टेस्ट पर जोर दिया है।

  • हॉस्टल के संचालक और स्टाफ समेत करीब 40 से 50 संदिग्धों का DNA सैंपल लिया जा रहा है।
  • अब तक 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
  • घटना के वक्त का सीसीटीवी फुटेज गायब मिला था, जिसकी अलग से डिजिटल जांच हो रही है।

SIT और CID की नई गाइडलाइन

मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गई है। CID ने जांच टीम को 59 बिंदुओं की एक लिस्ट दी है, जिस पर काम करना है। इसमें 5 जनवरी की रात से लेकर 6 जनवरी की दोपहर तक हॉस्टल में हुई हर गतिविधि की बारीकी से जांच करने को कहा गया है। लापरवाही बरतने के आरोप में अब तक दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है।

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