बिहार की राजनीतिक मंचों में हलचल मची है जब बिहार अपराध नियंत्रण कानून 2024 का प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें डीएम को असामाजिक तत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। इस कानून के तहत, डीएम को व्यक्तिगत स्तर पर जेल भेजने का अधिकार है यदि वह किसी को असामाजिक तत्व मानते हैं। यह कानून समय से पहले ही नजरअंदाज होने वाले कई मुद्दों को उजागर कर रहा है।
नया कानून की विवरण
नए कानून के अनुसार, डीएम को अगर लगता है कि किसी व्यक्ति या समूह के कार्यकलाप आम जनता को खतरा पहुंचा रहे हैं, तो वह उसे तड़ीपार करने का आदेश दे सकते हैं। इसके लिए डीएम को पहले स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, फिर उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, डीएम को नया कानून के तहत कोर्ट के समान पावर दिया गया है, जिससे उन्हें किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा।
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असामाजिक तत्व की परिभाषा
असामाजिक तत्व के तहत कई परिभाषाएं शामिल हैं, जिनमें अपराध, धर्म, समुदाय, और आतंकी गतिविधियों को समाहित किया गया है। इसके तहत व्यक्तियों को बच्चों के साथ यौन अपराध, साइबर क्राइम, और अनैतिक व्यापार के मामले में भी दोषी माना जाएगा।
इस कानून को लेकर सामाजिक और राजनीतिक विवाद उठ रहे हैं। कई विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने इसे अत्यधिक शक्तिशाली और अन्यायपूर्ण बताया है, जबकि सरकारी तथाकथित क्रिमिनल नेटवर्क को धमकी मिलने के खिलाफ इसे समर्थन दिया जा रहा है।
अब देखना है कि नए कानून को लेकर आगे क्या-क्या विकल्प उपलब्ध होते हैं और कैसे यह राजनीतिक और सामाजिक दायरे में आगे बढ़ता है।