सहरसा जिले में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के जरिए नियुक्त हुए शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है. पिछले तीन-चार सालों में बहाल हुए करीब 4000 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने साफ कर दिया है कि फर्जी प्रमाण पत्र पाए जाने पर न केवल नौकरी जाएगी, बल्कि अब तक लिया गया वेतन भी ब्याज समेत वसूला जाएगा. शिक्षा विभाग की इस सख्ती से उन शिक्षकों में डर का माहौल है जिन्होंने गलत तरीके से बहालियां पाई हैं.
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किन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में मिली है सबसे ज्यादा गड़बड़ी?
सहरसा जिले में Computer Science के शिक्षकों के दस्तावेजों में सबसे ज्यादा अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं. बिहार शिक्षा विभाग ने TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के तहत बहाल सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की गहन जांच के आदेश दिए हैं. जांच के दौरान यह संदेह जताया गया है कि इसमें किसी बड़े शिक्षा माफिया का हाथ है जिसका तंत्र काफी ऊपर तक फैला हुआ है. सहरसा के जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने पुष्टि की है कि शिकायतों के आधार पर जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
दस्तावेज सत्यापन और दोषी शिक्षकों पर क्या होगी कार्रवाई?
शिक्षा विभाग ने सभी नवनियुक्त शिक्षकों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. निगरानी विभाग की टीम लगातार दस्तावेजों का मिलान कर रही है. विभाग ने साफ किया है कि किसी भी हाल में फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है जिसमें अब तक हजारों की संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र पकड़े गए हैं.
- शिक्षकों को 16 जनवरी तक BPSC वॉटरमार्क वाले दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है
- फर्जी दस्तावेज मिलने पर नौकरी रद्द कर दी जाएगी और सेवा समाप्त होगी
- अब तक सरकार से लिए गए वेतन की वसूली ब्याज के साथ की जाएगी
- दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों पर FIR दर्ज कर जेल भेजा जाएगा
| विवरण | आंकड़े और जानकारी |
|---|---|
| जांच के दायरे में कुल शिक्षक | लगभग 4000 (सहरसा) |
| राज्यव्यापी जांच में फर्जी मिले शिक्षक | 2953 |
| दर्ज एफआईआर की संख्या | 1748 |
| दस्तावेज जमा करने की डेडलाइन | 16 जनवरी |






