बिहार में एक बार फिर से छात्रों का गुस्सा देखने को मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में UGC Regulation Act 2026 पर रोक लगा दी है, जिससे नाराज होकर कई छात्र संगठनों ने 2 फरवरी को पूरे बिहार में आंदोलन करने का ऐलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों द्वारा किया जा रहा है, जो मानते हैं कि नए नियम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी थे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी इस मुद्दे पर छात्रों का समर्थन किया है और कोर्ट के फैसले को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है।
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क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने 29 जनवरी 2026 को नए UGC नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी थी। कोर्ट का कहना था कि ये नियम स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इसमें सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई। इस फैसले के बाद पुराने यानी 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। लेकिन, आरक्षित वर्ग के छात्र और नेता इसे अपने हकों पर हमला मान रहे हैं। RJD नेता मनोज झा और तेज प्रताप यादव ने भी इस रोक की कड़ी आलोचना की है।
नए नियम में ऐसा क्या था?
UGC ने 2026 के नए नियमों में कैंपस में भेदभाव रोकने के लिए सख्त कदम उठाए थे। इसमें जातिगत भेदभाव की परिभाषा तय की गई थी और शिकायतों के लिए ‘इक्विटी कमेटी’ बनाने की बात थी। विरोध करने वाले छात्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक से अब उनके पास शिकायत करने का कोई मजबूत आधुनिक तरीका नहीं बचा है। वे मांग कर रहे हैं कि इन नियमों को तुरंत लागू किया जाए ताकि कैंपस में पिछड़े और दलित छात्रों को सुरक्षा मिल सके। अब सबकी नजरें 2 फरवरी के आंदोलन और 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।






