भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु पर सफर करना अब बेहद जोखिम भरा हो गया है। पुल की हालत पिछले कुछ महीनों में तेजी से बिगड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज छह महीने पहले जो एक्सपेंशन ज्वाइंट (जोड़) का गैप चार इंच था, वह अब बढ़कर आठ से नौ इंच हो गया है। कई जगहों पर यह दरार इतनी चौड़ी हो गई है कि ऊपर से नीचे बहती गंगा नदी साफ दिखाई देती है। एनएच के इंजीनियरों ने चेतावनी दी है कि पुल के बेयरिंग कई जगहों पर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे ढांचे पर भारी दबाव पड़ रहा है।
किन पिलर के पास सबसे ज्यादा खतरा है?
पुल पर करीब 13 से ज्यादा लोकेशन ऐसी हैं जहां स्थिति बहुत नाजुक है। विशेष रूप से पोल नंबर 89, 113, 125, 141, 148 और 128 के पास गैप खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। जब भी कोई भारी वाहन इन जगहों से गुजरता है, तो ‘धड़ाम’ की तेज आवाज आती है और गाड़ियों में बैठे लोगों को जोरदार झटका लगता है। यह कंपन इतना तेज होता है कि पुल हिलता हुआ महसूस होता है। हाल ही में इस खराब रास्ते की वजह से गाड़ियां आपस में टकरा गईं थीं, जिसमें छह लोग घायल हो गए थे।
मरम्मत और जाम को लेकर क्या है अपडेट?
विक्रमशिला पुल से रोजाना 25 से 30 हजार गाड़ियां गुजरती हैं, जिनमें 55 टन तक वजन वाले 6000 भारी ट्रक शामिल हैं। पुल की खराब हालत के कारण हाल ही में यहां 60 घंटे तक लंबा जाम लगा रहा। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पिछले 18 महीनों में हेडक्वार्टर को 8 से ज्यादा पत्र लिखकर जांच की मांग की है। विशेषज्ञों से सर्वे कराने के लिए तीन लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन वह भी अभी तक पास नहीं हुआ है। मंत्रालय ने सतह की मरम्मत के लिए कुछ राशि दी है, लेकिन पुल के मुख्य स्ट्रक्चर को बदलने के लिए अभी कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया है।






