क्या है इसमें:

यह लेख बताता है कि किस तरह छठ पूजा के बाद, पटना जंक्शन पर मजदूरों और उनके परिवारों की भीड़ बढ़ गई है, जो अन्य राज्यों में काम के लिए जा रहे हैं।




पटना: छठ पूजा के कुछ दिन बाद, पटना जंक्शन पर फिर से लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। प्लेटफार्म पर प्रवासी मजदूर और उनके परिवार नजर आ रहे हैं, जो लंबी दूरी की ट्रेनों में चढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। ये लोग तमिलनाडु, दिल्ली, सूरत, कोलकाता और मुंबई जा रहे हैं। यह स्थिति बिहार में रोजगार की कमी को दर्शाती है।



मंगलवार शाम को चलने वाली एर्नाकुलम सुपरफास्ट एक्सप्रेस सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली थी। इसमें सैकड़ों मजदूर यात्रा कर रहे थे। उनके लिए त्योहार का समय घर लौटने का एक छोटा सा मौका था, जिसके बाद उन्हें फिर से अन्य राज्यों में काम करना है।



लोगों की मजबूरी साफ है। जैसे कि अभिषेक कुमार, जो बिहार के बेगूसराय के रहने वाले हैं, ने कहा कि “परिवार और पैसे चुनावों से ज्यादा जरूरी हैं।” वे पिछले सात साल से तमिलनाडु में काम कर रहे हैं और वहां की नौकरी को बेहतर मानते हैं।



दूसरी ओर, पिंटू कुमार ने बताया कि रोजगार की कमी के कारण उन्हें अपने घर से दूर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में अच्छे रोजगार होते, तो कोई भी तीन दिन का सफर करने के लिए मजबूर नहीं होता।



चुनावों से पहले, लाखों मजदूर फिर से दक्षिण और पश्चिम भारत की ओर लौट रहे हैं। राजनीतिक दल विकास का वादा करते हैं, लेकिन मजदूरों के लिए यह प्राथमिकता नहीं है। वे अपने परिवार को पालने के लिए काम की तलाश में हैं और वोटिंग को बाद के लिए छोड़ रहे हैं।





सारांश:

  • पटना जंक्शन पर प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ है।

  • लोग तमिलनाडु, दिल्ली और अन्य राज्यों में काम के लिए जा रहे हैं।

  • परिवारिक जिम्मेदारियों के कारण लोग दूर जा रहे हैं।

  • बिहार में रोजगार की कमी से लोग मजबूर हैं।

  • चुनावों से पहले मजदूरों का पलायन बढ़ा है।



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