What’s inside:

This article shares information about the Pitru Paksha Mela at Punpun Ghat and the expected number of devotees, rituals, and current facilities.




पटना: हर साल की तरह इस बार भी पितृ पक्ष मेला शुरू हो गया है। यह मेला पनपुन घाट पर हो रहा है, जो पटना से लगभग 13 किलोमीटर दूर है। इस 16 दिवसीय महोत्सव में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जो 23 सितंबर तक चलेगा।



पनपुन घाट का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अपने पिता दशरथ के लिए पहला पिंडदान यहीं किया था। तभी से इसे मोक्ष का पहला द्वार माना जाता है और लोग यहाँ से गया जाकर श्राद्ध कर्म पूरा करते हैं।



घाट पर पंडितों ने चार मुख्य प्रकार के पिंडदान की जानकारी दी है। इनमें तिर्थ श्राद्ध, बरवाँ श्राद्ध, त्रिपाक्षी श्राद्ध और प्रेत श्राद्ध शामिल हैं जो विभिन्न उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं।



इस बार श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ कम हैं। सदी पुराना सूरजमल झूंजनवाला धर्मशाला केवल 11 कमरों का है और यहाँ बिजली, पानी और बिस्तर की कमी है। इसके पीछे लगे मोबाइल टॉयलेट भी साफ नहीं हैं, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।



भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं। पनपुन पुलिस स्टेशन की इंचार्ज ने बताया कि यहाँ जिला पुलिस और आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम तैनात की गई है। घाट पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और नदी के पानी का स्तर बढ़ने से सावधानी बरती जा रही है।





Summary:

  • पितृ पक्ष मेला पनपुन घाट पर शुरू हो चुका है।

  • इसमें 5 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।

  • चार प्रकार के पिंडदान की जानकारी दी गई है।

  • धर्मशाला में सुविधाओं की कमी हो रही है।

  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।



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