What’s inside:

यह लेख छठ पूजा के दौरान शाम के अरघ्य की तैयारी और उसके महत्व के बारे में है।




पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के घाटों पर आज शाम को हजारों मिट्टी के दीप जलाए जाएंगे। यह छठ पूजा का एक खास पल है, जब लोग सूर्य को संध्या अरघ्य अर्पित करते हैं।


इस चार दिन के त्योहार के तीसरे दिन, भक्त पारंपरिक कपड़ों में सजकर नदियों, तालाबों और जलाशयों के किनारे इकट्ठा होते हैं। वे सूरज देवता का धन्यवाद अर्पित करते हैं, जो जीवन का आधार हैं।


शाम का अरघ्य लगभग 5:30 बजे शुरू होगा और यह सोमवार की सुबह समाप्त होगा, जब भक्त उषा अरघ्य अर्पित करते हैं। इस दिन भक्त 36 घंटे का निर्जला उपवास खत्म करेंगे।


यह उपवास सहनशक्ति का परीक्षण है, और इसे समर्पण का प्रतीक माना जाता है। सूर्य को अर्पित अरघ्य का अर्थ है कि हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत है।


कल सुबह भक्त फिर से उषा अरघ्य अर्पित करने के लिए एकत्र होंगे, स्वास्थ्य, समृद्धि और अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करेंगे। इसके बाद वे अदरक पानी या शरबत के साथ अपना उपवास तोड़ेंगे।





Summary:

  • छठ पूजा के दौरान शाम को अरघ्य अर्पित किया जाएगा।

  • भक्त पारंपरिक परिधान में नदी किनारे इकट्ठा होंगे।

  • अरघ्य का समय शाम 5:30 बजे से शुरू होगा।

  • भक्त 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगे।

  • कल सुबह उषा अरघ्य अर्पित कर उपवास तोड़ेंगे।



Leave a comment