क्या है इस खबर में:

यह खबर बिहार के सृजन घोटाले में तीन लोगों को मिली सजा के बारे में है। अदालत ने उन्हें कड़ी सजा और जुर्माना लगाया है।




पटना में एक विशेष CBI अदालत ने सृजन घोटाले में पहली बार सजा सुनाई है। यह घोटाला बिहार के सबसे चर्चित वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक है। अदालत ने तीन लोगों को सजा दी, जिनमें एक पूर्व खजाना कर्मचारी और एक बैंक अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी धन को एक एनजीओ के खाते में स्थानांतरित किया।



CBI विशेष अदालत के जज सुनील कुमार II ने इस मामले में फैसला सुनाया। सभी तीन आरोपियों को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने अमरेंद्र कुमार यादव को चार साल की कड़ी सजा और 14 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।



आजय कुमार पांडेय को भी चार साल की सजा और 6.25 लाख रुपये का जुर्माना मिला। वहीं, राकेश कुमार, जो भारतीय बैंक में सहायक प्रबंधक थे, को तीन साल की सजा और 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।



सीबीआई ने इस मामले में 38 गवाहों के बयान दर्ज किए। अदालत ने पाया कि ये तीनों लोग सरकारी धन के अवैध हस्तांतरण में सीधे तौर पर शामिल थे। सृजन घोटाला 2003 से 2017 तक चला, जिसमें करीब 12 करोड़ रुपये का गलत हस्तांतरण हुआ।



यह फैसला सृजन घोटाले से जुड़े कई मामलों में से पहला है। आगे की सुनवाई और मामलों की प्रक्रिया अदालतों में जारी है।





सारांश:

  • सृजन घोटाले में तीन लोगों को सजा मिली है।

  • अदालत ने उन्हें कड़ी सजा और जुर्माना लगाया।

  • घोटाला 2003 से 2017 के बीच चला था।

  • सीबीआई ने 38 गवाहों के बयान दर्ज किए थे।

  • मामले की आगे की सुनवाई जारी है।



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