क्या है इस कहानी में:

यह कहानी एक माँ की मेहनत और उसके बेटे की सफलता के बारे में है, जो IAS बनने का सपना देखता है।




बिहार के गया जिले के एक छोटे से गाँव में एक माँ का सपना उसके परिवार का भविष्य बदल रहा है। रेनू देवी, जो एक छोटी सी किराना दुकान चलाती हैं, हमेशा चाहती थीं कि उनका कोई बच्चा IAS अधिकारी बने। डुमरिया ब्लॉक में जीवन आसान नहीं था, और यहाँ नक्सलवाद का असर भी था।


रेनू देवी ने केवल सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन शिक्षा की चाह कभी खत्म नहीं हुई। उनके पति, शंभू प्रसाद गुप्ता, ग्रेजुएट थे और परिवार का खर्च चलाने के लिए किराने की दुकान खोली। जब रेनू ने अपने सपने के बारे में बताया, तो शुरुआत में शंभू ने संकोच किया, लेकिन बाद में उन्होंने उसका समर्थन किया।


उनका बेटा संदीप कुमार शुरू से ही होशियार था। उसने गाँव में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और बाद में IIT की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए पटना गया। उसने अभ्यनंद के त्रिवेणी सुपर 30 में शामिल होकर पहले प्रयास में IIT की परीक्षा पास की और IIT मुंबई से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हुआ।


2017 में संदीप के दादा का निधन हो गया और कुछ घंटे बाद उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। संदीप ने परिवार का सहारा बनने के लिए घर लौट आया। उसकी माँ ने उसे उसके पिता के IAS बनने के सपने की याद दिलाई। प्रेरित होकर, संदीप ने अपनी प्राइवेट नौकरी छोड़ दी और UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया।


संदीप की यात्रा आसान नहीं थी। 2020 में वह इंटरव्यू के चरण तक पहुँचा लेकिन चयनित नहीं हुआ। 2021 में वह प्रीलिम्स भी नहीं पास कर सका। हर बार उसकी माँ ने उसे कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। उसने मेहनत जारी रखी और तीन साल में UPSC पास किया — पहले इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस, फिर IPS, और अंततः 2024 में IAS बन गया।





सारांश:

  • रेनू देवी का सपना उनके बेटे संदीप के IAS बनने की कहानी है।

  • संदीप ने IIT की परीक्षा पास की और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

  • पिता और दादा की मौत के बाद संदीप ने UPSC की तैयारी की।

  • संदीप ने तीन साल में UPSC पास किया और IAS बन गया।

  • वह अब प्रशासनिक सेवा में अपने जीवन का नया सफर शुरू कर रहा है।



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