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यह लेख भारत के पहले 12,000 हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के यात्रियों के लिए सेवा में आने की जानकारी देता है। यह बिहार के मधेपुरा में निर्मित हुआ है और रेलवे की क्षमता में वृद्धि का प्रतीक है।
पटना से एक बड़ी खबर आई है। बिहार के मधेपुरा में बने 12,000 हॉर्सपावर के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ने पहली बार यात्री सेवा में कदम रखा है। यह लोकोमोटिव दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव में से एक है और यह भारतीय रेलवे के लिए एक नई शुरुआत है।
सरकार के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत फ्रांसीसी कंपनी अल्स्टॉम के सहयोग से विकसित इस लोकोमोटिव ने इस महीने राज्या रानी एक्सप्रेस को साहारसा–समस्तीपुर–पटना मार्ग पर चलाना शुरू किया है। रेलवे अधिकारी बताते हैं कि यह लोकोमोटिव जल्द ही प्रमुख लंबी दूरी की ट्रेनों में भी इस्तेमाल होगा।
इस लोकोमोटिव की अधिकतम गति 120 किमी/घंटा है और यह ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए एक उन्नत तीन-चरणीय प्रणोदन प्रणाली से लैस है। इससे ट्रेनों की समयबद्धता और पर्यावरण प्रदर्शन में सुधार होगा। इसके अलावा, यह 6,000 टन भार ले जाने की क्षमता रखता है।
मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री, जिसका उद्घाटन 2018 में नरेंद्र मोदी ने किया था, अब सालाना लगभग 100 लोकोमोटिव का उत्पादन कर सकती है। इस फैक्ट्री का उद्देश्य भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है और यह अन्य उत्पादन इकाइयों में भी डिजाइन संस्कृति को प्रभावित कर रही है।
अब इस लोकोमोटिव का इस्तेमाल यात्रियों के लिए किया जा सकता है, जो भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना सकता है। मधेपुरा के लिए, यह विकास के एक नए युग की शुरुआत है।
Summary:
- भारत के पहले 12,000 हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ने यात्री सेवा शुरू की।
- यह मधेपुरा, बिहार में निर्मित हुआ है।
- राज्या रानी एक्सप्रेस अब इस लोकोमोटिव द्वारा चलाई जा रही है।
- यह लोकोमोटिव 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा कर सकता है।
- यह भारतीय रेलवे के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।






