<h2>बिहार की मिट्टी में उग रहा जैविक खेती का नया सवेरा</h2>
बिहार के किसानों के चेहरे पर आज खुशी की लहर है। जैविक खेती की नई तकनीक ने उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ ला दिया है। पटना, गया, और भागलपुर के किसान अब रसायनिक खाद छोड़कर प्राकृतिक तरीकों से फसल उगा रहे हैं और कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।
<h3>किसान राम प्रसाद की सफलता की कहानी</h3>
भागलपुर के नावदा गांव के किसान राम प्रसाद साह ने बताया कि पहले वे रासायनिक खाद पर हजारों रुपए खर्च करते थे। अब जैविक खाद बनाकर वे न सिर्फ पैसे बचा रहे हैं बल्कि उनकी फसल भी बेहतर हो रही है। उनके धान की पैदावार 20% बढ़ गई है और बाजार में जैविक चावल की अच्छी कीमत मिल रही है।
<h3>सरकारी योजनाओं से मिल रहा भरपूर साथ</h3>
बिहार सरकार की जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को:
• मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है
• बायो-फर्टिलाइजर बनाने के लिए अनुदान मिल रहा है
• जैविक सर्टिफिकेशन के लिए सहायता दी जा रही है
• बाजार तक पहुंचने के लिए सहकारी समितियां बनाई गई हैं
<h3>स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी फायदा</h3>
जैविक खेती से न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ रही है। रसायन मुक्त खाना खाने से लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर हो रहा है। पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पहल जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मददगार है।
<h3>आने वाले समय की योजनाएं</h3>
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले 3 सालों में बिहार के 50% किसानों को जैविक खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी दोगुनी होगी बल्कि बिहार एक जैविक राज्य के रूप में पहचान बनाएगा।
यह बदलाव बिहार के गांवों में नई उम्मीद जगा रहा है। जैविक खेती की यह क्रांति बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






