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इस लेख में बिहार के सबसे अमीर और गरीब जिलों की जानकारी दी गई है, साथ ही आर्थिक विकास और चुनावी वादों पर चर्चा की गई है।




पटना में विधानसभा चुनावों की तैयारी के साथ ही बिहार के सबसे अमीर और गरीब जिलों पर चर्चा हो रही है। पटना, जो राज्य की राजधानी है, सबसे अमीर जिला है, जहाँ प्रति व्यक्ति आय 1,21,396 रुपये है। यहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के परिवार रहते हैं।



इसके विपरीत, चंपारण, जहाँ महात्मा गांधी ने 1917 में अपना पहला सत्याग्रह शुरू किया था, बिहार का पांचवाँ सबसे गरीब जिला है। चंपारण की पूर्वी चंपारण की प्रति व्यक्ति आय केवल 22,698 रुपये है, जबकि पश्चिमी चंपारण की 25,700 रुपये है। 1971 में, चंपारण को पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में विभाजित किया गया था।



बिहार में आर्थिक विषमताएँ स्पष्ट हैं। पाँच सबसे अमीर जिलों—पटना, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, और रोहतास—की प्रति व्यक्ति आय 34,881 रुपये से लेकर 1.2 लाख रुपये से अधिक है। दूसरी ओर, पाँच सबसे गरीब जिलों—शेयोहार, सीतामढ़ी, अररिया, मधुबनी, और पूर्वी चंपारण—की प्रति व्यक्ति आय 19,561 रुपये से 22,698 रुपये के बीच है।



हालांकि इन विषमताओं के बावजूद, बिहार की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। 2022-23 में, राज्य की जीडीपी 15.5% बढ़ी। बिहार की प्रति व्यक्ति आय 13.9% बढ़कर 59,637 रुपये हो गई। फिर भी, चंपारण जैसे कई जिलों में गरीबी और कम आय जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।



विधानसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियाँ इन आर्थिक विषमताओं पर ध्यान दे रही हैं और गरीब जिलों के विकास के लिए वादे कर रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावों में इन मुद्दों पर कितना ध्यान दिया जाता है।





Summary:

  • पटना सबसे अमीर और चंपारण सबसे गरीब जिला है।

  • चंपारण की प्रति व्यक्ति आय 22,698 रुपये है।

  • बिहार में आर्थिक विषमताएँ स्पष्ट हैं।

  • राज्य की जीडीपी में वृद्धि हो रही है।

  • चुनावों में गरीब जिलों के विकास के वादे हो रहे हैं।



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