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इस आर्टिकल में बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन और राहुल गांधी की चुनावी मुहिम के प्रभाव पर चर्चा की गई है।




पटना में 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल ने NDA की मजबूत वापसी और ग्रैंड अलायंस के लिए स्पष्ट झटका दिखाया है। इस बीच, कांग्रेस के लिए एक बड़ा सवाल उठता है कि राहुल गांधी की मुहिम का कितना असर हुआ है?


एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस की चुनावी उपस्थिति के बावजूद, राहुल गांधी की कोशिशें वोटों में नहीं बदल पाईं। पार्टी को 17 से 23 सीटें मिलने की संभावना है, जो 2020 के चुनावों के समान है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राहुल की रैलियों का बिहार के मतदाताओं पर असर नहीं पड़ रहा है।


राहुल गांधी ने अपनी मुहिम के दौरान वोट चोरी, रोजगार, शिक्षा, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शासन और भ्रष्टाचार को लेकर हमले किए। हालांकि, एग्जिट पोल बताते हैं कि यह बड़ी भीड़ वोटों में नहीं बदली।


कांग्रेस का पारंपरिक आधार, जैसे ऊँची जातियाँ और अल्पसंख्यक, पिछले दो दशकों में कमजोर हुआ है। जबकि RJD अब भी पिछड़ी जातियों और मुस्लिम वोट में मजबूत है, कांग्रेस की स्थानीय संगठन की कमी ने उसे राज्य की राजनीति में हाशिये पर रखा है।


एग्जिट पोल के अनुसार, NDA को 130-138 सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि ग्रैंड अलायंस को 100-108 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 17-23 सीटें मिलने का अनुमान है, जो उसके पिछले प्रदर्शन के समान है। यह दिखाता है कि कांग्रेस का बिहार में राजनीतिक प्रभाव सीमित है।





Summary:

  • NDA की मजबूत वापसी का अनुमान है।

  • कांग्रेस को 17-23 सीटें मिल सकती हैं।

  • राहुल गांधी की मुहिम वोटों में नहीं बदली।

  • कांग्रेस का पारंपरिक आधार कमजोर हुआ है।

  • राजनीतिक प्रभाव सीमित रहने की आशंका है।



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