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बिहार ने अपने कृषि क्षेत्र में एक बार फिर देश में पहचान बनाई है। इस खबर में पुरस्कारों और उनके महत्व पर चर्चा की गई है।




भोजपुरी में बात करें तो, बिहार ने एक बार फिर अपनी खेती-किसानी की प्रतिभा को साबित किया है। हाल ही में नई दिल्ली में पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण के 21वें स्थापना दिवस समारोह में यह सम्मान मिला।


इस मौके पर मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ को “प्लांट जीनोम सेवियर कम्युनिटी अवार्ड” मिला। वहीं, रोहतास के किसान नाकुल सिंह को “प्लांट जीनोम सेवियर फार्मर अवार्ड” से नवाजा गया। उन्होंने “खीरमोहन” चावल की किस्म पर बेहतरीन काम किया है।


बिहार कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार किसानों की मेहनत और विश्वविद्यालय की नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


संघ की अध्यक्ष बिनिता देवी ने इस पुरस्कार को किसानों की मेहनत का परिणाम बताया। नाकुल सिंह ने भी बिहार कृषि विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे बिहार के खेती-किसानी समुदाय के लिए गर्व का पल बताया।


इस पुरस्कार से बिहार के किसानों को प्रेरणा मिलेगी और वे नई तकनीकों और किस्मों के विकास में आगे बढ़ेंगे। यह सम्मान निश्चित ही कृषि क्षेत्र में और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।





Summary:

  • बिहार ने कृषि क्षेत्र में दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं।

  • मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ और किसान नाकुल सिंह को सम्मानित किया गया।

  • बिहार कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति ने इसे गर्व का पल बताया।

  • यह पुरस्कार किसानों की मेहनत और नवाचार को दर्शाता है।

  • किसानों को नई तकनीकों के विकास में प्रेरणा मिलेगी।



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