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यह लेख बिहार के अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन के बारे में है, जो साल में सिर्फ 15 दिनों के लिए सक्रिय रहता है। यहाँ लोग पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने आते हैं।
बिहार के औरंगाबाद में अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन एक अनोखी जगह है। यह स्टेशन साल में केवल 15 दिन ही खुलता है, जब यहाँ लोग आते हैं। यह समय पितृ पक्ष का होता है, जो इस साल 7 से 21 सितंबर तक मनाया जाएगा।
इस दौरान यात्री यहाँ रुककर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करते हैं। इसके बाद, वे अपने सफर को जारी रखते हैं। बाकी 350 दिनों तक यह स्टेशन सुनसान रहता है, जहाँ की दीवारें टूटने लगी हैं और ट्रेनों के लिए ट्रैक बेकार पड़े हैं।
ब्रिटिश राज में इस स्टेशन की स्थापना की गई थी ताकि लोग यहाँ पहले श्राद्ध कर सकें। यहाँ केवल आठ जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें ही रुकती हैं। श्रद्धालु यहाँ टिकट लेकर आते हैं, थोड़ी देर रुककर पूजा करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं।
स्थानीय निवासी अमरदीप कुमार बताते हैं कि पहले यहाँ कोई सुविधा नहीं थी। अब रेलवे ने इस साल कुछ सुविधाएं जैसे कि रोशनी, पुलिस और पानी की व्यवस्था की है। लेकिन फिर भी, यह स्टेशन काफी सुनसान लगता है।
नदी के किनारे स्थित विष्णु धाम मंदिर परिसर में माहौल पूरी तरह बदल जाता है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन, जीवन और मृत्यु के बीच की एक कड़ी है, जहाँ यादें जीवित रहती हैं।
Summary:
- अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन साल में केवल 15 दिन खुलता है।
- यहाँ श्रद्धालु पितृ पक्ष में पिंडदान करते हैं।
- स्थानीय निवासी बताते हैं कि स्टेशन की सुविधाएँ सीमित हैं।
- विष्णु धाम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
- यह स्टेशन जीवन और मृत्यु के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान है।






