What’s inside:
यह लेख बिहार में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना की प्रगति और भूमि अधिग्रहण के बारे में जानकारी देता है।
बिहार के गया जिले में डोभी स्थित अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। यहां लगभग 1,671.71 एकड़ भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जिसमें सरकारी भूमि और किसानों से खरीदी गई भूमि शामिल है।
इस परियोजना में 13 गांवों का क्षेत्र शामिल है, जैसे मंगरुचाक, वनवासी, किशोरिया और गजिचक। अधिकारियों का कहना है कि यह औद्योगिक केंद्र रेल, सड़क और वायु परिवहन से जुड़ा होगा, जिससे पूर्वी भारत में व्यापार और परिवहन में आसानी होगी।
इस परियोजना के तहत 1,113.92 एकड़ में एक क्लस्टर सेंटर बनाया जाएगा, जिसमें औद्योगिक फैक्ट्रियों के लिए 1,040 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह परियोजना खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों को समर्पित होगी, जिससे लगभग 1 से 1.5 लाख नौकरियों का सृजन होने की उम्मीद है।
हालांकि, किसानों ने मुआवजे में देरी को लेकर चिंता जताई है। कुछ गांव वालों का कहना है कि वे अपनी भूमि दे चुके हैं, लेकिन अब भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण विभाग के अधिकारी इस प्रक्रिया को जारी रखने का दावा कर रहे हैं।
अब तक लगभग 100 कंपनियों ने साइट का निरीक्षण किया है, और एक नई चार-लेन सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल का विस्तार करेगा, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
Summary:
- बिहार में डोभी में भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो गया है।
- कॉरिडोर 13 गांवों को जोड़ेगा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा।
- प्रोजेक्ट से 1 से 1.5 लाख नौकरियों की संभावना है।
- किसानों को मुआवजे में देरी की समस्या है।
- नई सड़कें और कनेक्टिविटी की योजनाएं प्रस्तावित हैं।






