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पटना में दुर्गा पूजा के दौरान भक्तों और पंडाल आयोजकों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।
पटना में दुर्गा पूजा नजदीक आ रही है, और प्रशासन ने भक्तों और पंडाल आयोजकों की सुरक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी पंडालों को अग्नि सुरक्षा उपायों का पालन करना अनिवार्य है, और जो इसका पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने कहा है कि हर पंडाल के चारों ओर पर्याप्त खुली जगह होनी चाहिए ताकि किसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियाँ आसानी से पहुँच सकें। पंडालों का निर्माण आग से बचाने वाले कपड़े से किया जाना चाहिए, और हर पंडाल में अग्निशामक यंत्र, रेत और पानी हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए।
बड़े पंडालों में हर 100 वर्ग मीटर पर एक 9-लीटर का अग्निशामक होना चाहिए। पंडालों को रेलवे लाइनों, ट्रांसफार्मर और अन्य खतरनाक क्षेत्रों से कम से कम 15 मीटर की दूरी पर बनाना आवश्यक है। इसके अलावा, पटाखों के प्रदर्शन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
अब तक, अग्निशामक विभाग ने शहर में 525 पंडालों की जांच की है और 35 को खतरे में पाया है। पंडाल आयोजकों को तीन दिन का समय दिया गया है ताकि वे सुरक्षा मानकों को पूरा कर सकें। बिजली विभाग को भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खराब वायरिंग की मरम्मत करने के लिए कहा गया है।
अन्य नियमों में पंडाल की न्यूनतम ऊँचाई तीन मीटर रखना, सिंथेटिक कपड़ों और रस्सियों से बचना, दो निकासी द्वार उपलब्ध कराना और आपातकालीन रोशनी सुनिश्चित करना शामिल हैं। आयोजकों को इन दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है ताकि समारोह सुरक्षित और सुचारू रूप से मनाया जा सके।
Summary:
- दुर्गा पूजा के लिए पटना में सख्त सुरक्षा नियम लागू हुए हैं।
- पंडालों के चारों ओर खुली जगह होना जरूरी है।
- अग्निशामक यंत्र और पानी पंडालों में हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए।
- 35 पंडालों को खतरनाक माना गया है और सुधार के लिए समय दिया गया है।
- आयोजकों से दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।






