What’s inside:
इस लेख में बिहार विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं पर लगे आरोपों और कोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी दी गई है।
नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण घटना हुई है। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, दिल्ली की रौस एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, और तेजस्वी यादव को IRCTC होटल टेंडर स्कैम में आरोपी घोषित किया है।
कोर्ट ने कहा कि इस टेंडर धोखाधड़ी की पूरी साजिश लालू की जानकारी में हुई थी। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, जिससे उनके परिवार को लाभ हुआ। यह मामला लालू के रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी में दो IRCTC होटलों के टेंडर से जुड़ा है।
लालू यादव ने आरोपों को “बेतुके” और राजनीतिक प्रेरित बताया। उन्होंने कोर्ट में व्हीलचेयर पर आकर अपनी बात रखी, जबकि तेजस्वी ने कहा कि वे कानूनी तरीके से इस मामले का सामना करेंगे। चुनाव नजदीक हैं, इसलिए ऐसी चीजें होना स्वाभाविक है।
तेजस्वी ने कहा कि उनके पिता ने भारतीय रेलवे को 90,000 करोड़ रुपए का लाभ पहुंचाया है और वे इस मामले में गलत तरीके से निशाना बनाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे बीजेपी से डरने वाले नहीं हैं और बिहार के लोग सच जानते हैं।
कोर्ट ने अब सभी तीन आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू करने का निर्णय लिया है। अगर ये तीनों दोषी पाए गए, तो उन्हें एक से सात साल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही, भूमि-के-नौकरियों के मामले में फैसले की तारीख 10 नवंबर को तय की गई है।
Summary:
- लालू, राबड़ी और तेजस्वी को IRCTC टेंडर स्कैम में आरोपी बनाया गया है।
- कोर्ट ने कहा कि लालू का इस मामले में हस्तक्षेप था।
- लालू ने आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया है।
- तेजस्वी ने कानूनी लड़ाई का भरोसा दिलाया है।
- ट्रायल शुरू होगा और सजा एक से सात साल हो सकती है।






